मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर प्रक्रिया, सिंचाई परियोजनाओं में अनियमितताओं और फर्जी बैंक गारंटी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बड़े टेंडरों में लगातार कुछ ही कंपनियां ‘फलोदी कंस्ट्रक्शन और गुप्ता कंस्ट्रक्शन’ ही शामिल हो रही हैं। उनका कहना है कि यह प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि टेंडरों का “रोटेशन सिस्टम” है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि विभाग में नौशाद और अश्विन नाटू जैसी गैर सरकारी हस्तियों की भूमिका संदिग्ध है और इनका संबंध कंपनियों और नेताओं-मंत्रियों के रिश्तेदारों के साथ है। इसी के साथ उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं में तकनीकी अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पंद्रह दिन में उनकी मांगों का संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है और कहा है कि ऐसा न होने पर कांग्रेस सीबीआई दफ्तर में एक डेलिगेशन भेजकर इस पूरे मसले की सीबीआई में दस्तावेज सहित जांच करने का आवेदन देगी।
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जीतू पटवारी ने लगाए गंभीर आरोप
भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि जल संसाधन विभाग की टेंडर प्रक्रिया पर कुछ सीमित कंपनियों का कब्जा है, जिसमें फलोदी कंस्ट्रक्शन और गुप्ता कंस्ट्रक्शन (मालिक जगदीश गुप्ता) बार-बार L1, L2 या L3 बनकर सामने आती हैं। उन्होंने इसे प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि “टेंडर रोटेशन सिस्टम” करार दिया, जिससे अन्य कंपनियों को अवसर नहीं दिया जा रहा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने नौशाद और अश्विन नाटू नामक व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए। ये सरकारी अधिकारी नहीं हैं, लेकिन ठेकेदारों के साथ व्यावसायिक संबंध रखते हैं और टेंडर में हिस्सेदारी की आशंका जताई गई है। जीतू पटवारी के अनुसार इन लोगों, कंपनियों के मालिकों और कुछ नेताओं/मंत्रियों के रिश्तेदारों के दुबई में साझा व्यापारिक संबंध भी सामने आए हैं जो वित्तीय नेटवर्क और मनी ट्रेल की जांच की मांग को मजबूत करता है।
कमीशन के कारण टेंडर रोकने का आरोप लगाया
जीतू पटवारी ने सवाल किया कि पिछले डेढ़ वर्ष से जल संसाधन विभाग में बड़े टेंडर क्यों नहीं लगाए गए हैं। किसान परेशान है, सिंचाई परियोजनाएं रुकी हुई हैं लेकिन टेंडर प्रक्रिया ठप है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसकी वजह टेंडरों के “परसेंटेज” के हिसाब-किताब में गड़बड़ी है और क्या कमीशन का गणित तय नहीं होने के कारण टेंडर प्रक्रिया रोक कर रखी गई है।
फर्जी बैंक गारंटी और अन्य अनियमितताएं
इसी के साथ उन्होंने फर्जी बैंक गांरटी का आरोप भी लगाया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जल निगम में फर्जी बैंक गारंटी का मामला सामने आने के बाद 9 दिसंबर 2024 को इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी (e-BG) लागू करने का आदेश जारी हुआ था, लेकिन जल संसाधन एवं एनवीडिए विभाग में अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं हुई। कई कंपनियां फर्जी गारंटी पर टेंडर हासिल कर एडवांस भुगतान निकाल रही हैं और काम में देरी कर रही हैं। यदि सभी बैंक गारंटियों की जांच हो तो बड़े ठेकेदारों और संरक्षकों के नाम सामने आ सकते हैं।
उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं में तकनीकी धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया, जैसे HDPE पाइप लगाकर DI पाइप का भुगतान निकालना, यानी सस्ती सामग्री पर महंगे बिल पास करना। पिछले डेढ़ वर्ष से बड़े टेंडर नहीं लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि शायद कमीशन के “परसेंटेज” में गड़बड़ी के कारण प्रक्रिया ठप है।
कांग्रेस ने की ये मांगें, सीबीआई में शिकायत की चेतावनी
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया है कि नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं? क्या सभी बैंक गारंटियों की जांच होगी? e-Bank Guarantee लागू होगी? और क्या 2023-24 के टेंडरों की न्यायिक जांच होगी? जीतू पटवारी ने सरकार से मांग की है कि जल संसाधन विभाग की सभी बैंक गारंटियों की तत्काल जांच कराई जाए, जल संसाधन एवं एनवीडीए विभाग में e-Bank Guarantee प्रणाली लागू की जाए, 2023-224 के टेंडरों की न्यायिक जांच कराई जाए और किए गए भुगतानों का स्वतंत्र प्राइवेट ऑडिट कराया जाए। जीतू पटवारी ने कहा है कि सरकार ने अगर पंद्रह दिन में कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस सीबीआई में दस्तावेजों सहित पूरे मामले की शिकायत करेगी।