मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए प्रदेश को “घोटाला प्रदेश” करार दिया है। उन्होंने व्यापम घोटाला और महाकाल लोक जैसे मामलों का हवाला देते हुए अब राज्य में “निवेश घोटाले” का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार विधानसभा में 4.91 लाख करोड़ रुपये के निवेश और हजारों रोजगार के दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा शासन में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं और अब निवेश के आंकड़ों में भी गड़बड़ी उजागर हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा में दावा किया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित हुए हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिला है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और जमीनी जांच से संकेत मिलता है कि जिन फैक्ट्रियों के आधार पर ये आंकड़े पेश किए गए उनमें से कई वास्तव में संचालित ही नहीं हैं।

कमलनाथ ने लगाए निवेश घोटाले के आरोप

कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश ‘घोटाला प्रदेश’ बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापम घोटाले से लेकर महाकाल लोक तक के घोटालों के बाद अब ‘निवेश घोटाला’ सामने आया है। उन्होंने कहा कि “विधानसभा में भाजपा सरकार ने लाखों करोड़ के आंकड़े पेश कर दावा किया कि प्रदेश में 4.91 लाख करोड़ का निवेश हुआ है और बड़ी संख्या में फैक्टरियां चल रही हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन फैक्टरियों में हकीकत में संचालन ही नहीं हो रहा। सरकार निवेश और रोजगार दोनों के बारे में भ्रामक आंकड़े पेश कर रही है।”

सरकार से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घोटाले से पूरी दुनिया में मध्यप्रदेश की औद्योगिक निवेश की छवि खराब हो रही है और प्रदेश के लाखों बेरोज़गार युवाओं का भविष्य चौपट हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जनता को भ्रमित करना बंद करें और निवेश घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा मे दिसंबर 2025  में एक सवाल के जवाब में सरकार द्वारा जानकारी दी गई कि दो वर्षों में 746 उद्योग स्थापित हुए और कुल निवेश लगभग 8,016 करोड़ रुपये हुआ जिससे 57,565 लोगों को रोजगार मिला। वहीं, फरवरी 2026 में दूसरे सवाल पर कहा गया कि दो वर्षों में 724 उद्योग शुरू हुए और निवेश लगभग 4.91 लाख करोड़ पहुंच गया। इस तरह सिर्फ तीन महीने के अंतर में उद्योगों की संख्या 22 कम हुई लेकिन निवेश का आंकड़ा 61 गुना बढ़ गया। यह असंगति खुद सरकार के दावों पर सवाल खड़े करती है और अब कांग्रेस भी इसपर सवाल उठा रही है।