पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश सरकार को प्रशासनिक विफलताओं के मुद्दे पर घेरा है।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की लचर प्रशासनिक व्यवस्था ने गरीबों को घर देने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना को भी बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है।

उन्होंने कहा कि ‘जब प्रधानमंत्री आवास जैसी बहुप्रचारित परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश का यह हाल है तो समझा जा सकता है, गरीबों को मदद पहुँचाने की अन्य योजनाओं पर मध्य प्रदेश किस तरह कछुआ चाल से चल रहा होगा।’

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कमलनाथ ने सरकार को घेरा

कमलनाथ ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 139 करोड़ रुपये की लागत से दो परियोजनाएं शुरू की गई थीं।अब तक इन पर 170 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं फिर भी लगभग 40 फीसदी काम अधूरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन मकानों के लिए जिन लाभार्थियों ने आवेदन किया था उन्होंने लोन लेकर अपनी राशि जमा की थी  लेकिन जिन्हें 2020 में फ्लैट मिलने चाहिए थे उन्हें अब तक घर घर नसीब नहीं हुए हैं।

प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया

कांग्रेस नेता ने कहा है कि इन हितग्राहियों को को लगातार लोन की किस्तें चुकानी पड़ रही हैं..जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। लगातार प्रशासनिक लापरवाही की खबरें पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे प्रदेश में कोई शासन व्यवस्था बची ही ना हो। कमलनाथ ने कहा कि जब प्रधानमंत्री आवास जैसी बहुप्रचारित योजना का यह हाल है तो कल्पना कीजिए कि अन्य योजनाओं की जमीनी स्थिति क्या होगी।