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दिग्विजय सिंह ने लाड़ली बहना योजना पर उठाए सवाल, कहा “क्या ये पैसा इनके मामा के घर से आता है”

Written by:Shruty Kushwaha
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कांग्रेस नेता ने कहा कि आज के समय में 1250 रुपये की मासिक राशि महिलाओं की बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने महंगी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पौष्टिक आहार की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा कि इतनी मामूली राशि में बच्चों का पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना असंभव है।
दिग्विजय सिंह ने लाड़ली बहना योजना पर उठाए सवाल, कहा “क्या ये पैसा इनके मामा के घर से आता है”

Digvijaya Singh on Chidambaram Statement

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार की लाड़ली बहना योजना पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे महज दिखावे और शोर मचाने का जरिया बताते हुए कहा कि 1250 रुपये की मासिक सहायता से महिलाओं की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो सकती हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह पैसा सरकार के मामा के घर से आता है। उन्होंने मोहन भागवत द्वारा लाडली बहनों को तीन संतानों को जन्म देने के आह्वान का जिक्र करते हुए कहा कि इस महंगाई में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, दूध और पौष्टिक आहार की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि इतनी मामूली राशि में तीन बच्चों का पालन-पोषण करना असंभव है।

दिग्विजय सिंह ने लाड़ली बहना योजना पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने लाड़ली बहना योजना को लेकर प्रदेश बीजेपी सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि लाडली बहनों की राशि को लेकर शोर मचाया जाता है लेकिन क्या ये पैसा सरकार के मामा के घर से आता है। उन्होंने कहा कि ‘क्या महंगी शिक्षा, मंहगी स्वास्थ सेवाओं, महंगे दूध और पौष्टिक आहार के वर्तमान दौर में 1250 रुपए महीना ऊंट के मुंह में जीरा भी नही है।’

कहा ‘सुरक्षित भविष्य की नौकरियां देकर आत्मनिर्भर बनाएं’

इसी के साथ, मोहन भागवत द्वारा तीन संतानें पैदा करने के आह्वान पर निशाना साधते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा है कि ऐसी नीतियां महिलाओं पर बोझ बढ़ाने के समान हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि बीमारी की स्थिति में निजी अस्पतालों में इलाज कराना भी इस राशि से संभव नहीं। कुपोषण से बचाव, बिजली बिल चुकाना, तीज-त्योहार और बच्चों के जन्मदिन मनाना भी इस राशि में संभव नहीं है। कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी उठाया कि सरकारी अंग्रेजी स्कूलों की कमी के चलते महिलाएं अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ाने में असमर्थ हैं। और 1250 रुपये में तीन बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर बनाने का तो सवाल ही नहीं उठता। दिग्विजय सिंह ने पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के नजरिए का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं और उनके परिवारों को सशक्त बनाने के लिए स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना जरूरी है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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