मिसरोद के सरकारी स्कूल में बच्चों का फिर फूटा गुस्सा, शिक्षिका को हटाने की मांग पर अड़े छात्र

भोपाल के मिसरोद स्थित शासकीय स्कूल में छात्रों ने फिजिक्स शिक्षिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रांसफर से असंतुष्ट विद्यार्थी निलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर स्कूल के गेट पर धरने पर बैठे हैं।
मिसरोद के सरकारी स्कूल में बच्चों का फिर फूटा गुस्सा, शिक्षिका को हटाने की मांग पर अड़े छात्र

भोपाल के मिसरोद स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में फिजिक्स पढ़ाने वाली शिक्षिका बबीता कुशवाहा के खिलाफ विद्यार्थियों का गुस्सा एक बार फिर से भड़क उठा है। शुक्रवार को स्कूल के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने मुख्य गेट के सामने बैठकर जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। बच्चे शिक्षिका को केवल ट्रांसफर करने के बजाय पूरी तरह से निलंबित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

दरअसल इससे पहले भी 5 अक्टूबर को विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में भारी हंगामा और प्रदर्शन किया था। उस समय मौके पर पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी ने बच्चों को पूरी जांच करके सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया था। हालांकि इतने दिन बीत जाने के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बच्चों का सब्र टूट गया और उन्होंने दोबारा आंदोलन का रास्ता चुन लिया।

हाथ-पैर दबाने और प्रताड़ित करने के आरोप

कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने शिक्षिका पर बेहद चौंकाने वाले और गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षिका उनसे पढ़ाने के बजाय अपने घरेलू काम करवाती थीं और क्लास में बैठाकर हाथ-पैर दबवाती थीं। दरसल, जब भी कोई बच्चा उनका काम करने से मना करता था, तो उसे प्रैक्टिकल की परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाती थी और मानसिक रूप से परेशान किया जाता था।

इतना ही नहीं कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि शिक्षिका लड़कों के सामने लड़कियों के चरित्र को लेकर गलत और भद्दी बातें करती थीं। बच्चों ने उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि प्रशासन की तरफ से इन सभी आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन बच्चों के इस गुस्से ने स्कूल के माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

बागरोदा ट्रांसफर से नाखुश हैं छात्र

पिछली बार हुए विरोध के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षिका का तबादला पास के बागरोदा स्कूल में कर दिया था। लेकिन विद्यार्थी इस फैसले से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। दरसल, बागरोदा स्कूल भी मिसरोद संकुल के तहत ही आता है, जिसके कारण बच्चों को डर है कि मामला ठंडा होते ही शिक्षिका को दोबारा इसी स्कूल में भेज दिया जाएगा। इसी वजह से वे ट्रांसफर रद्द कर निलंबन की मांग कर रहे हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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