MP Breaking News
Google पर फॉलो करें

MP में 300 करोड़ का अनाज बर्बाद, उमंग सिंघार बोले “गरीबों के हक का राशन गोदामों में सड़ रहा”

गोदामों में अनाज खराब होने के मामले ने भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि गरीबों के हक का निवाला उनकी थाली तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने में बीजेपी नाकाम रही है।
Umang Singhar

Umang Singhar

मध्यप्रदेश के गोदामों में लाखों टन खाद्यान्न खराब होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2026 के बीच सरकारी और निजी गोदामों में करीब 300 करोड़ रुपये का एक लाख मीट्रिक टन से ज्यादा अनाज बर्बाद हो गया। नमी, बारिश, चूहों और समय पर उठाव नहीं होने को इसके पीछे की बड़ी वजह बताया गया है।

इस मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि गरीबों के हक का राशन गोदामों में सड़ रहा है और सरकार इसकी जिम्मेदारी लेने के बजाय चुप है। उन्होंने कहा कि खराब हुए खाद्यान्न में लगभग 70 फीसदी गेहूं और 20 फीसदी धान-चावल शामिल है।

छह इलाकों के गोदामों में 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं खराब

सीएजी और एमपी के संबंधित विभागों की रिपोर्ट के अनुसार रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, सोहागपुर, औबेदुल्लागंज और विदिशा के गोदामों में करीब 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं खराब होने की बात सामने आई है। वहीं बारिश में भीगने और नमी के कारण करीब 21 हजार मीट्रिक टन धान और चावल बर्बाद होने का उल्लेख है।

चना और मूंग भी इससे अछूते नहीं रहे। घुन लगने के कारण करीब 8,500 मीट्रिक टन दलहन खराब होने की बात सामने आई है। यानी नुकसान सिर्फ गेहूं और चावल तक सीमित नहीं रहा बल्कि दलहन का बड़ा हिस्सा भी गोदामों में खराब हुआ।

अनाज बचता तो लाखों जरूरतमंदों को मिल सकता था राशन

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र व्यक्ति को हर महीने पांच किलो खाद्यान्न देने का प्रावधान है। इसी आधार पर रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि बर्बाद हुए अनाज से करीब दो करोड़ लोगों को एक महीने का राशन दिया जा सकता था। वहीं करीब आठ लाख परिवारों की एक साल की खाद्य जरूरत पूरी करने की क्षमता भी इस अनाज में थी। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इतनी मात्रा में खाद्यान्न का बेहतर इस्तेमाल होता तो दो लाख से अधिक कुपोषित बच्चों और महिलाओं को पोषण संबंधी मदद मिल सकती थी।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि गरीबों के हक का निवाला उनकी थाली तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राजमहल के शाही व्यंजनों के बीच शायद भूख का एहसास नहीं होता।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस अनाज के रखरखाव और ढुलाई पर सरकार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी थी। इसके बावजूद वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन, एफसीआई और निजी भंडारण व्यवस्था में लापरवाही के कारण बड़ी मात्रा में खाद्यान्न उपयोग के लायक नहीं बचा। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब प्रदेश में गरीब परिवारों को राशन की जरूरत है और बड़ी संख्या में बच्चे व महिलाएं कुपोषण से प्रभावित हैं तो इतना अनाज गोदामों में कैसे सड़ गया। उन्होंने कहा कि इस अनाज को समय रहते बचाया जाता तो बड़ी संख्या में जरूरतमंदों तक इसका लाभ पहुंच सकता था।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews
MP में 300 करोड़ का अनाज बर्बाद, उमंग सिंघार बोले "गरीबों के हक का राशन गोदामों में सड़ रहा"