इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के यहां लोकायुक्त की रेड में करोड़ों रुपये की संपत्ति सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को भाजपा सरकार के कार्यकाल में बढ़ते भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए सरकार और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार के शासन में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के यहां लोकायुक्त जांच में करोड़ों रुपये की संपत्ति, आलीशान भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, जिम, बैंक लॉकर और विभिन्न निवेशों का खुलासा होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार का एक संगठित तंत्र काम कर रहा है।
क्या है मामला
बता दें कि बुधवार को इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। जांच के दौरान अधिकारी और उनके परिजनों से जुड़ी बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में इंदौर, पीथमपुर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कई संपत्तियों का पता चला है। इनमें आवासीय और व्यावसायिक भूखंड, कृषिभूमि और अन्य निवेश शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा बैंक लॉकर और अन्य वित्तीय निवेशों की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक मूल्यांकन में उनकी वैध आय लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि अब तक सामने आई कुल संपत्ति का मूल्य करीब 9.5 से 10.83 करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई अभी जारी है और आगे संपत्तियों का मूल्यांकन बढ़ सकता है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद विपक्ष ने इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए सवाल किए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना को भाजपा शासन में भ्रष्टाचार की “व्यवस्था” बताया। उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार के राज में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था बन चुका है। यह किसी एक अफसर की कहानी नहीं, बल्कि संगठित तंत्र की तस्वीर है। जब एक अधिकारी इतनी अकूत संपत्ति जुटा रहा था, तब सरकार, विभाग और निगरानी तंत्र क्या कर रहे थे।” कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की कि सिर्फ छापेमारी तक सीमित रहने के बजाय भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचकर उन लोगों की भी जवाबदेही तय की जाए, जिनके संरक्षण में ऐसे मामलों को बढ़ावा मिल रहा है।






