भोपाल: मध्यप्रदेश में बिजली कटौती, खाद-बीज की किल्लत, सूखे जैसे हालात और फसलों की खरीदी को लेकर किसान चिंतित हैं। खेती-किसानी से जुड़ी इन समस्याओं के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं और राहत की उम्मीद लगाए किसान सरकार से समाधान की आस कर रहे हैं। इसी बीच, इन मुद्दों को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार को दशहरे तक का अल्टीमेटम दिया है।
बता दें कि भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने मंगलवार को राजधानी भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही समस्याओं के निराकरण करे, नहीं तो संघ बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि संघ बातचीत के माध्यम से उचित समाधान चाहता है लेकिन सीएम डॉ. मोहन यादव से चर्चा करने के लिये अब तक समय नहीं दिया गया है।
ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती की समस्या
कमल सिंह आंजना ने बताया कि दीवाली का पर्व नजदीक आ गया है लेकिन किसान बिजली, पानी, खाद और बीज की समस्याओं को लेकर परेशान हो रहा है। ग्रामीणों इलाकों में बिजली कटौती की समस्या लगातार सामने आ रही है। रात के 10 बजते ही बिजली काट दी जाती है। जबकि यह समय लोगों के सोने का होता है। इसस ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों और परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री से चर्चा की उम्मीद
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। संभव है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्यमंत्री या प्रशासन किसानों को चर्चा के लिए बुलाए। संघ बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि सरकार को दशहरे तक का समय दिया जा रहा है। इसके बाद भी मांगों पर चर्चा नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
राज्य के 20 से 22 जिलों में सूखे जैसे हालात होने का दावा
भारतीय किसान संघ प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि किसानों की मांग है कि जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित है, उनकी खरीदी उसी दर पर हो। उन्होंने सोयाबीन और धान की खरीदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार भावांतर देने की बात कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसानों को इसका लाभ कैसे मिलेगा। इसके साथ ही, प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश के 20 से 22 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। कई क्षेत्रों में नदी-नाले खाली हैं। आने वाले दिनों में पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सिंचाई के लिए बिजली और पानी नहीं मिलेगा, तो किसान फसल कैसे उगाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए समय पर पानी मिलना जरूरी है।





