मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 7 अप्रैल 2026 को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई । इस बैठक में चना एवं मसूर के 3 वर्ष में उपार्जन के लिए ,आरटीई में अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए और पीएमश्री स्कूल योजना के लिए एक बड़ी राशि स्वीकृति की गई। इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को छात्रगृह योजना में प्रतिमाह 10 हजार रुपये देने का भी निर्णय लिया गया। इन फैसलों से किसानों, छात्रों और आमजन को बड़ा लाभ मिलेगा।
कैबिनेट बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम 8 अप्रैल से आरंभ होकर 14 अप्रैल तक चलेंगे। राज्य स्तरीय कार्यक्रम भिंड जिला मुख्यालय पर होगा। जिला मुख्यालयों सहित सभी विकासखंडों में भी कार्यक्रम किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभारी मंत्रियों को अपने प्रभार के जिले के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय कर, आवश्यक समन्वय करने के निर्देश दिए।
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कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 88.41 करोड़ :
मंदसौर जिले की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना लागत राशि 88.41 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। परियोजना से मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील के 12 ग्रामों में 3500 हैक्टेयर में सिंचाई सुविधा का लाभ होगा।
चना एवं मसूर का 3 वर्ष में उपार्जन के लिए 3,174 करोड़ :
- चना एवं मसूर के उपार्जन के लिए रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) के लिए चना एवं मसूर के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष सहित 3 वर्ष के उपार्जन कार्य के लिए3,174 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
- रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 1,058 करोड़ रुपये 1 वर्ष की अवधि के लिए, रबी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए 1,058 करोड़ रुपये 1 वर्ष की अवधि के लिए एवं रबी विपणन वर्ष 2028-29 के लिए 1,058 करोड़ 1 वर्ष की अवधि के लिए निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति अथवा अग्रिम राशि विपणन संघ को उपलब्ध कराई जाएगी।
- रबी विपणन वर्ष 2026-27, रबी विपणन वर्ष 2027-28 एवं रबी विपणन वर्ष 2028-29 में दलहनी फसलों-चना एवं मसूर का उपार्जन किया जाएगा। राज्य सहकारी विपणन संघ भोपाल द्वारा उपार्जन किया जाएगा।
- भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत चना के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत और मसूर के कुल उत्पादन का 100 प्रतिशत उपार्जन किया जायेगा। चना एवं मसूर के उपार्जन में मंडी शुल्क में छूट प्रदान की जायेगी।
RTE के तहत अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस भरेगी सरकार :
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम अनुसार गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के लिये फीस प्रतिपूर्ति योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2030-31 तक की निरंतरता को स्वीकृति दी गई है। इसके लिए 3,039 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई।
पीएमश्री स्कूल योजना के लिए 940 करोड़
- पीएमश्री स्कूल योजना के वर्ष 2031 तक विस्तार के लिए राज्यांश 940 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान दी गई ।
- पीएमश्री स्कूल एक केन्द्र प्रायोजित योजना है, भारत सरकार द्वारा पीएमश्री स्कूल योजना को सितंबर 2022 में अनुमोदित किया गया।
- इसका उद्देश्य चयनित स्कूलों को 5 वर्षों की अवधि में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 अनुरूप अनुकरणीय विद्यालयों (Exemplar Schools) के रूप में विकसित करना है।
छात्रगृह योजना में प्रतिमाह 10 हजार मिलेंगे:
- दिल्ली में उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत मध्य प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों के लिए छात्रगृह योजना में जनजातीय कार्य विभाग की भांति प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह 10 हजार रुपये के भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई है।
- योजनांतर्गत प्रति वर्ष 100 नवीन छात्रों एवं पूर्व से अध्ययनरत छात्रों को लाभ मिलेगा।
- इसमें 50 नवीन स्नातक, 50 नवीन स्नातकोत्तर और 50 पूर्व से अध्ययनरत छात्रों के लिए 1 वर्ष के मान से 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पुस्तकें:
- प्रदेश के सभी हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में अध्ययरत छात्र छात्राओं के लिए निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता के लिए योजनान्तर्गत 2030-31 तक प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत मूल्य वृद्धि की गई है।
- इसके साथ ही नामांकन में वृद्धि के मान से लाभान्वित होने वाले छात्रों की संख्या के आधार पर 693 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई ।
- बता दें कि निःशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण योजना में प्रदेश के समस्त शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत् छात्र छात्राओं को पाठ्य पुस्तक निगम से पुस्तकें मुद्रित कराकर निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (FTRI) की स्थापना :
- वित्तीय प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित सभी स्तरों के कार्मिकों को केंद्रीकृत एवं मानकीकृत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (FTRI) की स्थापना, आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधन अकादमी, भोपाल के परिसर में की जाएगी।
- संस्थान का उद्देश्य वित्तीय प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित सभी स्तरों के कार्मिकों को केंद्रीकृत एवं मानकीकृत प्रशिक्षण प्रदान करना होगा। प्रदेश में वर्तमान में संचालित 7 लेखा प्रशिक्षण शालाओं का चरणबद्ध एकीकरण कर राज्य स्तरीय एकीकृत प्रशिक्षण व्यवस्था स्थापित की जायेगी।
- संस्थान के लिए पद सृजन पर राज्य शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। तीन वर्षों 2026-27, 2027-28, 2028-29 में स्थापना और संचालन के लिए वित्तीय लागत लगभग 26 करोड़ रूपये आयेगी।
वाणिज्यिक कर विभाग की 8 योजनाओं 2031 तक:
- वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत 8 योजनाओं की 2030-2031 तक निरन्तरता और लगभग 2,952 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया है। इसमें मध्यप्रदेश नगरीय अधोसंरचना विकास निधि का 2026-2027 से 2030-2031 तक निरन्तरता और 1,317 करोड़ 62 लाख रुपये का अनुमोदन किया गया है।
- सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, आबकारी सामग्री की खरीद, विभागीय दुकानों का संचालन एवं कार्यालय भवनों का निर्माण का वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरतंरता और 120 करोड़ 98 लाख रुपये का अनुमोदन किया गया है।
- स्टॉम्प्स की लागत के लिए 806 करोड़ रूपये और मुख्यालय स्थापना व्यय एवं जिला कार्यपालिक स्थापना के लिए 1,428 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया है।
अन्य निर्णय
- मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार द्वारा स्वीकृत कार्य आयोजना के प्रावधानों के अनुसार वन क्षेत्रो में पुनरुत्पादन, पुनर्स्थापना एवं संरक्षण कार्यवृत्तों में उपचार कार्य के लिए 01 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक कुल 05 वर्षो के लिए 5,215 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत प्रथम वर्ष उपचार कार्यों के साथ-साथ विगत वर्षों में कराए गए कार्यों का रखरखाव भी सम्मिलित है।
- भारत सरकार की RCS-UDAN योजना के तहत उज्जैन स्थित शासकीय हवाई पट्टी को बोइंग 320 एयरबस विमानों के संचालन के लिये विकास/विस्तार करने के लिये राज्य सरकार एवं भाविप्रा के मध्य आवश्यक अनुबंध एवं MOU निष्पादित हो चुका है। योजना में राज्य सरकार द्वारा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को भूमि उपलब्ध कराई जाती है। कैबिनेट द्वारा इस कार्य के लिए कुल 437.5 एकड़ भूमि अधिग्रहित करने और राशि 590 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।