राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया है जिसके बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक सियासी पारा हाई हो चला है। इस फैसले के विरोध में मंगलवार देर रात प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस विधायक और नेताओं ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में धरने दिया। दिल्ली में भी कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन व धरने के बाद चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को 10 जून 2026 को दोपहर 12 बजे निर्वाचन सदन, अशोका रोड, नई दिल्ली में बातचीत के लिए समय दिया है। अब दोपहर में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के दफ्चर पहुंचकरअपनी बात रखेगा और मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द किए जाने पर कार्रवाई की मांग करेगा। वहीं कांग्रेस नेता भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक उपवास रखेंगे। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। सबकी निगाहें अब इस बातचीत पर टिकी हुई है।
ये है पूरा मामला
- दरअसल, 8 जून को कांग्रेस द्वारा नामांकन भरे जाने के बाद 9 जून को भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और भाजपा नेता राहुल कोठारी ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नटराजन ने अपने नामांकन फॉर्म में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी कथित तौर पर छुपाई है।
- भाजपा की शिकायत पर रिटर्निंग आफिसर ने उन्हें नोटिस देकर 9 जून को शाम 5:30 बजे तक जवाब देने के लिए कहा था, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब ना मिलने और चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने पर निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया।
- इसकी खबर लगते ही मंगलवार रात करीब 10 बजे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, मप्र प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, आरिफ मसूद सहित कई विधायक भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। करीब आधे घंटे बाद डिप्टी सीईओ कार्यालय पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल को बुधवार को मुलाकात का समय दिया।
- इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सचिन पायलट समेत कई दिग्गज नेता भी नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय (निर्वाचन सदन) पहुंचे। शुरुआत में शाम के समय वरिष्ठ अधिकारियों के न होने की बात कहकर उन्हें अंदर जाने से रोका गया, जिसके बाद नाराज कांग्रेस नेताओं ने दफ्तर के बाहर ही धरना दे दिया।
- भारी हंगामे के बाद केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल को आयोग के दफ्तर में जाने की अनुमति मिली, जहां उन्होंने शुरुआती ज्ञापन सौंपा। इसके बाद चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को मामले की विस्तार से समीक्षा और अपनी बात रखने के लिए बुधवार दोपहर 12 बजे का औपचारिक समय दिया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला या एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं है, उन्हें केवल 10 करोड़ के मुआवजे से जुड़ा एक दीवानी/अदालती नोटिस मिला था, जिसका जवाब उनके वकील ने दे दिया था। ऐसा पहली बार हुआ है कि सिर्फ़ एक नोटिस की वजह से राज्यसभा उम्मीदवार का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया हो जबकी उनके ख़िलाफ़ कोई केस या FIR नहीं है।
नियमों के मुताबिक हलफनामे में सिर्फ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है, साधारण नोटिस की नहीं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मुलाकात करने के बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देने का ऐलान किया है। इधर, नटराजन के नामाकंन रद्द होने के बाद अब इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे राज्य की तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा होना लगभग तय माना जा रहा है।






