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MP में SIR को लेकर सियासी घमासान: उमंग सिंघार ने लगाया ‘साइलेंट डिलीशन’ का आरोप, निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर जताई आपत्ति

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पहले ही लाखों नाम प्रारूप सूची से बाहर किए जा चुके हैं और अब ‘विसंगति’ के आधार पर आम नागरिकों को नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विधानसभा-वार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
MP में SIR को लेकर सियासी घमासान: उमंग सिंघार ने लगाया ‘साइलेंट डिलीशन’ का आरोप, निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर जताई आपत्ति

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि SIR की अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले “साइलेंट डिलीशन” यानी गुप्त व अनापत्ति हटाने की तैयारी की जा रही है, जिससे लाखों नागरिकों का मताधिकार छीनने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर उन्होंने मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है और अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘हमने पहले ही स्पष्ट किया था, SIR का मतलब Special Intensive Revision नहीं बल्कि Selective Intensive Removal बनता जा रहा है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों को नोटिस भेजकर बेवजह परेशान किया जा रहा है और सिर्फ धार ज़िले में ही चार 4 लाख से अधिक नागरिकों को नोटिस भेजने की तैयारी है।

उमंग सिंघार ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर “साइलेंट डिलीशन” की तैयारी की जा रही है, जिससे लाखों वैध मतदाताओं के नाम काटे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रारूप सूची से पहले ही 42 लाख नाम काटे जा चुके हैं और अब ‘विसंगति’ (Discrepancy) के नाम पर और नाम हटाने की योजना है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारी और जिला स्तर के अधिकारी खुद नहीं जानते कि “विसंगति” में क्या करना है, फिर आम नागरिकों को अनावश्यक नोटिस भेजकर परेशान क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिता के नाम में मामूली असंगति, उम्र का अनुमान या एल्गोरिदम आधारित डेटा कभी भी मताधिकार छीनने का आधार नहीं बन सकता।

निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र

उमंग सिंघार ने सिंघार ने इसे “Selective Intensive Removal” करार देते हुए कहा कि SIR का असली मतलब चुनिंदा तरीके से नाम हटाना बनता जा रहा है। उन्होंने मांग की कि अगर प्रक्रिया पारदर्शी है तो मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग विधानसभा-वार बुलेटिन जारी करे। इसी के साथ ये भी बताया जाए कि कितने नोटिस भेजे गए, कितनी सुनवाई हुई, कितने नाम कटे या बहाल हुए हैं। कांग्रेस नेता ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में आज मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा है और ‘विसंगति’ के नाम पर हो रही मनमानी व संभावित ‘साइलेंट डिलीशन’ पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।