कमलनाथ ने प्रदेश भाजपा सरकार पर वेयरहाउसिंग व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8600 से अधिक निजी वेयरहाउस हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 4.20 करोड़ मीट्रिक टन है, लेकिन सरकार ने सिर्फ 79.57 लाख मीट्रिक टन का ही उपयोग किया है। नतीजतन..81% वेयरहाउस पूरी तरह खाली पड़े हैं और हजारों मालिक पिछले तीन साल से किराए के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वेयरहाउस मालिकों के लाखों-करोड़ों रुपये अटके हुए हैं। सरकार ने भी 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान सरकार ने रोक रखा है। उन्होंने कहा कि “यह किसी प्राकृतिक कारण से नहीं हुआ, बल्कि सरकार की लापरवाही, भुगतान रोकने और कुप्रबंधन की वजह से हुआ है। यह प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सरकार द्वारा की गई आर्थिक हत्या है। जनता अब जवाब मांग रही है और सरकार को यह जवाब देना ही होगा।”

कमलनाथ ने सरकार पर लगाए आरोप

कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार ने मार्कफेड, सिविल सप्लाई निगम और नेफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से निजी वेयरहाउस लिए, लेकिन किराया और भुगतान रोक दिया। उन्होंने कहा कि लोगों ने सरकार पर भरोसा करके जमीन गिरवी रखकर करोड़ों के वेयरहाउस बनाए थे लेकिन अब तीन-तीन साल से पैसा न मिलने के कारण वे बैंक के कर्ज में डूब चुके हैं। कई मालिक अपने घर, जमीन और जेवर बेचकर EMI भर रहे हैं, फिर भी कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जब देश में भंडारण की जरूरत बढ़ रही है, तब मध्यप्रदेश में हजारों वेयरहाउस ताले डालकर खड़े हुए हैं। प्याज भंडारण का पैसा भी अटका है।

बीजेपी से किए सवाल

पूर्व सीएम ने सरकार को घेरते हुए सवाल किए हैं कि आखिर हजारों करोड़ रुपये का भुगतान क्यों नहीं किया गया? वेयरहाउस खाली क्यों रखे गए? भुगतान रोकने का फैसला किसने और क्यों लिया? और उन हजारों लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा जो सरकार पर भरोसा करके आज कर्ज में डूब चुके हैं? उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर सरकार तमाशा देख रही है। किसानों, व्यापारियों और वेयरहाउस मालिकों की मेहनत और पूंजी को नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जनता जवाब मांग रही है और सरकार को इसका जवाब देना होगा।