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MP में बदलेगा Wildlife Tourism का अंदाज, केंद्रीय पर्यटन सचिव ने बताया चंबल से जंगल तक कैसे बढ़ेंगे नए अनुभव

MP Travel Mart 2026 में वन्यजीव पर्यटन के बदलते स्वरूप पर मंथन, चंबल की डॉल्फिन, गांधीसागर की जैव विविधता और पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनुभवों को पर्यटन से जोड़ने पर हुई बात
MP Travel Mart 2026 MP Wildlife Tourism Bhuvnesh Kumar

MP Travel Mart 2026 MP Wildlife Tourism Bhuvnesh Kumar

भोपाल। बाघ और जंगल सफारी मध्य प्रदेश के Wildlife Tourism की पहचान हैं, लेकिन आने वाले समय में इसके अनुभवों का दायरा इससे कहीं आगे जा सकता है। चंबल में डॉल्फिन, गांधीसागर की जैव विविधता, गिद्धों के संरक्षण से जुड़े क्षेत्र और पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनुभवों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं हैं। MP Travel Mart 2026 में केंद्रीय पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि Wildlife Tourism का विस्तार इस तरह हो जिसमें पर्यटक प्रकृति को करीब से जानें, संरक्षण को समझें और पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय लोगों तक भी पहुंचे।

Travel Mart के दूसरे दिन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर भोपाल में वन्यजीव, स्थानीय समुदाय और सतत पर्यटन पर हुई पैनल चर्चा का केंद्र भी यही रहा। पर्यटन और Wildlife क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का जोर पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनके अनुभव को बेहतर बनाने और पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने पर रहा।

चंबल की डॉल्फिन से गिद्धों के संरक्षण तक

केंद्रीय पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि मध्य प्रदेश में वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। कूनो में चीता संरक्षण इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। अब जरूरत Wildlife Tourism को केवल वन्यजीव देखने तक सीमित न रखकर प्रदेश की दूसरी प्राकृतिक खूबियों से भी जोड़ने की है।

इसी संदर्भ में उन्होंने चंबल में डॉल्फिन, गांधीसागर की जैव विविधता और गिद्ध संरक्षण का जिक्र किया। उन्होंने कहा  गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनुभव भी पर्यटन का हिस्सा बन सकते हैं।

कुमार ने पर्यटन की सफलता को लेकर भी एक अहम बात कही। उनके मुताबिक केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है। पर्यटन का फायदा स्थानीय समुदाय को कितना मिला और प्रकृति के संरक्षण में उसका क्या योगदान रहा, इसका आकलन भी जरूरी है। पर्यटकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने के साथ स्थानीय लोगों को बेहतर आतिथ्य और संवाद के लिए प्रशिक्षित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

कान्हा से आगे बढ़ेगा Wildlife Tourism का दायरा

मध्य प्रदेश के Wildlife Tourism में कान्हा के साथ दूसरे वन क्षेत्रों की भूमिका भी बढ़ाने की तैयारी है। मध्य प्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के CEO एल. कृष्णमूर्ति के मुताबिक रातापानी, सतपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य जैसे क्षेत्रों को भी वन्यजीव पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है।

उनका कहना था कि आज पर्यटक केवल जंगल घूमने नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव लेने आते हैं जो लंबे समय तक उनके साथ रहे। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड और वाहन चालकों की ट्रेनिंग तथा स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

संरक्षण और रोजगार को साथ लेकर चलने की तैयारी

पर्यटन सचिव एवं मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने प्रदेश के लिए संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल की बात रखी। इसमें प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर तैयार करने पर जोर है।

उन्होंने भारत में जन्मी चीता के पांच शावकों को जन्म देने को चीता संरक्षण की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक वन्यजीव संरक्षण के ऐसे प्रयासों को जिम्मेदार पर्यटन के अनुभवों से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।

पर्यटक जंगल देखें ही नहीं, उसे समझें भी

पैनल में Wildlife Tourism के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। एंड बियॉन्ड एशिया के निदेशक टोबी सिंक्लेयर ने कहा कि जंगल का अनुभव केवल बाघ तक सीमित नहीं होना चाहिए। पक्षी, दूसरे वन्यजीव, प्रकृति और स्थानीय जीवन भी इसकी पहचान हैं। इसके लिए ऐसे प्रशिक्षित गाइड जरूरी हैं जो पर्यटकों को किसी स्थान की कहानी और उसकी खासियत समझा सकें।

सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स के महाप्रबंधक डेविड राजू ने भी गाइड के ज्ञान और प्रशिक्षण को पर्यटकों के अनुभव से जोड़ा। चर्चा में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और माधव राष्ट्रीय उद्यान सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को पर्यटन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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