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MPPSC Assistant Professor भर्ती में बहु दिव्यांगों को आरक्षण नहीं, अभ्यर्थियों का सवाल “अलग-अलग योग्य तो इनका संयोजन अयोग्य कैसे”

MPPSC की 2022, 2024 और 2025 की सहायक प्राध्यापक भर्ती को लेकर बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने सवाल किए हैं। उन्होंने MPSET में भी आरक्षण नहीं मिलने के मुद्दे पर अपना विरोध जताया है।
MPPSC Mains Exam

मध्यप्रदेश में सहायक प्राध्यापक भर्ती को लेकर बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका इस बात का विरोध किया है कि MPPSC की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022, 2024 और 2025 में बहु दिव्यांग श्रेणी को आरक्षण और रोजगार के अवसर नहीं दिए गए। इस श्रेणी के लिए आरक्षित पदों को श्रवण बाधित, लोकोमोटिव और दृष्टिबाधित श्रेणियों में समायोजित कर दिया गया है।

बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग ने कार्य की प्रकृति के आधार पर उन्हें सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य नहीं माना है। इसी को लेकर उन्होंने सवाल किए हैं कि जब श्रवण बाधित, लोकोमोटिव और दृष्टिबाधित अभ्यर्थी इस पद के लिए योग्य हैं तो इनमें से दो या अधिक दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को अयोग्य मानने का आधार क्या है? उन्होंने कहा कि जब सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्य की प्रकृति के आधार पर श्रवण बाधित, लोकोमोटिव, दृष्टि बाधित को योग्य माना जा रहा है तो तो श्रवण बाधित + लोकोमोटिव या श्रवण बाधित + दृष्टि बाधित या दृष्टि बाधित+ लोकोमोटिव योग्य क्यों नहीं है, यह सबसे बड़ा सवाल पैदा करता है।

MPSET में भी आरक्षण नहीं मिलने का विरोध

अभ्यर्थियों ने MPPSC की ओर से आयोजित MPSET 2022-2025 को लेकर भी ये मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि इसमें भी बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं दिया गया है जबकि UGC NET और CSIR NET में इस श्रेणी को आरक्षण मिलता है।

बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अलावा स्कूल शिक्षा वर्ग-1 और तकनीकी शिक्षा के ITI में भी उन्हें कार्य की प्रकृति के आधार पर योग्य नहीं माना गया है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश के बाहर देश के अन्य हिस्सों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों को योग्य माना जाता है।

अभ्यर्थियों ने अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप

अभ्यर्थियों ने इसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 में मिले अधिकारों से जोड़ा है। उनका आरोप है कि बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण और रोजगार के अवसर से बाहर रखने से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने इस पूरे मामले को उठाते हुए सहायक प्राध्यापक भर्ती में उन्हें आरक्षण और रोजगार का अवसर दिए जाने की मांग की है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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