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NCERT की किताब में इमरजेंसी के पाठ पर भड़के उमंग सिंघार, बताया जनता को भ्रमित करने वाली BJP की साजिश

सिंघार ने कहा देश के एक खास दौर के इतिहास को जिस तरह तोड़-मरोड़कर और केवल एकतरफा दृष्टिकोण से शामिल किया गया है, वह पूरी तरह से सत्ताधारी दल द्वारा प्रायोजित एजेंडा दिखाई देता है। बच्चों को शिक्षा देने के नाम पर राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास की सिलेक्टिव ब्रांडिंग करना बेहद निंदनीय है।
Leader of the Opposition Umang Singhar

Umang Singhar

NCERT ने इस वर्ष के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में इमरजेंसी यानि आपातकाल का पाठ भी जोड़ा है, नई किताब ‘Understanding Society: India and Beyond’ (ग्रेड 9, पार्ट 1) के अध्याय 6 में ‘लोकतंत्र की चुनौतियां’ (Challenges to Democracy) शीर्षक के अंतर्गत यह सेक्शन जोड़ा गया है। जिसमें इंदिरा गांधी द्वारा 1975 से 1977 के बीच लागू किए गए आपातकाल से जुड़े घटनाक्रम, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उसके प्रभाव और नागरिक अधिकारों पर पड़े असर का उल्लेख किया गया है। इसमें आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक प्रमुख चुनौती बताया गया है। पुस्तक में यह उल्लेख है कि आपातकाल के दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। वहीं प्रेस सेंसरशिप बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का भी संदर्भ दिया गया है।

NCERT द्वारा जोड़े गए इमरजेंसी के पाठ पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है, मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लेकर भाजपा और एनसीईआरटी पर निशाना साधा है , उन्होंने X पर लिखा- “इतिहास की आधी-अधूरी जानकारियों से जनमानस को भ्रमित करने की भाजपाई साजिश”

एकतरफा दृष्टिकोण सत्ताधारी दल द्वारा प्रायोजित एजेंडा, इतिहास की सिलेक्टिव ब्रांडिंग

सिंघार ने लिखा- NCERT की नौवीं कक्षा की नई किताब में देश के एक खास दौर के इतिहास को जिस तरह तोड़-मरोड़कर और केवल एकतरफा दृष्टिकोण से शामिल किया गया है, वह पूरी तरह से सत्ताधारी दल द्वारा प्रायोजित एजेंडा दिखाई देता है। बच्चों को शिक्षा देने के नाम पर राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास की सिलेक्टिव ब्रांडिंग करना बेहद निंदनीय है। इस नए अध्याय में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव और विपक्षी आंदोलनों का उल्लेख तो बढ़ा-चढ़ाकर किया गया है, लेकिन इसके पीछे की पूरी सच्चाई और देश की संप्रभुता को अस्थिर करने वाली ताकतों की भूमिका को जानबूझकर छिपा लिया गया है। बच्चों के अविकसित मानस को भ्रमित करने का यह प्रयास शिक्षा व्यवस्था का शुद्ध राजनीतिकरण है।

1980 में जनता ने इंदिरा गांधी को पूर्ण बहुमत देकर दोबारा प्रधानमंत्री बनाया

सिंघार ने कहा-  यदि वह दौर सिर्फ नकारात्मक था, तो लोकतंत्र की सबसे बड़ी अदालत यानी जनता का फैसला भाजपा क्यों छिपाती है? इतिहास गवाह है कि आपातकाल के बाद जब लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं बहाल हुईं, तो इसी देश की महान जनता ने 1980 के आम चुनाव मे इंदिरा गांधी को प्रचंड पूर्ण बहुमत देकर दोबारा देश का प्रधानमंत्री बनाया।

इतिहास की किताबों का इस्तेमाल विपक्ष पर कीचड़ उछालने का ‘चुनावी टूल’ 

कांग्रेस नेता ने पूछा-  क्या NCERT की किताबों में 1980 के उस ऐतिहासिक चुनाव और जनता के उस विश्वास का सच भी उतनी ही प्रमुखता से पढ़ाया जाएगा? या फिर इतिहास की किताबों का इस्तेमाल केवल विपक्ष पर कीचड़ उछालने के लिए एक ‘चुनावी टूल’ के रूप में किया जा रहा है?

सरकार शिक्षा के भगवाकरण, इतिहास से छेड़छाड़ का खेल बंद करे

अगर देश की जनता उस दौर को केवल एकतरफा नजरिए से देखती, तो इंदिरा गांधी की ऐसी ऐतिहासिक वापसी कभी संभव नहीं होती। जनता का वह जनादेश इस बात का अकाट्य प्रमाण था कि देश को स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत नेतृत्व की कितनी जरूरत थी। उन्होंने कहा सरकारी दबाव में पाठ्यपुस्तकों में हेरफेर करके महान नेताओं के योगदान को कभी नहीं मिटाया जा सकता। सरकार शिक्षा के भगवाकरण और इतिहास से छेड़छाड़ का यह खेल तुरंत बंद करे।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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