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काव्य संध्या के साथ राजकमल प्रकाशन के भोपाल किताब उत्सव का समापन, पाँच दिन में 32 सत्र, 100 से अधिक साहित्यकारों की भागीदारी

Written by:Shruty Kushwaha
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किताब उत्सव में बड़ी संख्या में पुस्तक-प्रेमियों की उपस्थिति रही। उत्सव का उद्घाटन छह सितंबर को हुआ और इस सत्र में साहित्य और कला जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ मौजूद रहीं जिनमें गोविन्द मिश्र, विजय बहादुर सिंह, महेश कटारे, अब्दुल बिस्मिल्लाह, शिवमूर्ति, राजेश जोशी, रेखा कास्तवार, कुमार अम्बुज, मनोज रूपड़ा, सविता भार्गव तथा भोपाल क्षेत्र के अनेक पुस्तक-मित्र शामिल थे।
काव्य संध्या के साथ राजकमल प्रकाशन के भोपाल किताब उत्सव का समापन, पाँच दिन में 32 सत्र, 100 से अधिक साहित्यकारों की भागीदारी

Rajkamal Prakashan Bhopal Kitab Utsav

भोपाल में 6 से 10 सितंबर तक हिंदी भवन में राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय किताब उत्सव का बुधवार को समापन हुआ। इस दौरान 5,000 से अधिक पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाने के साथ ही 32 सत्रों में लेखक-पाठक संवाद, परिचर्चाएँ, रचना-पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम हुए जिसमें भोपाल के साथ देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आनेवाले 100 से अधिक साहित्यकारों व रंगकर्मियों और हजारों की संख्या में पुस्तक प्रेमियों की भागीदारी रही।

किताब उत्सव के अंतिम दिन कार्यक्रम का समापन काव्य संध्या के साथ हुआ। यहां कुमार अम्बुज, पवन करण, सविता भार्गव, नीलेश रघुवंशी, वसंत सकरगाए, श्रुति कुशवाह, अनिल करमेले, आरती, आस्तीक वाजपेयी, अरुणाभ सौरभ, चित्रा सिंह, धीरेन्द्र सिंह फ़ैयाज़ और नेहल शाह ने कविताएँ पढ़ीं।

पाठ और चर्चा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

भोपाल किताब उत्सव के अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरुआत ‘पाठसुख’ सत्र के साथ हुई। इस दौरान मनोज कुमार पांडेय ने अपने कहानी-संग्रह ‘प्रतिरूप’, तसनीफ़ हैदर ने अपने उपन्यास ‘नया नगर’ और सुमेर सिंह राठौर ने अपनी किताब ‘बंजारे को चिट्ठियाँ’ से अंशपाठ किया।

दूसरे सत्र में उस्मान ख़ान के कविता-संग्रह ‘इच्छाओं के जीवाश्म’ के सन्दर्भ में मनोज कुमार पांडेय ने उनसे चर्चा की। इस अवसर पर उस्मान ख़ान ने कहा कि मैं अलग-अलग जगह रहा हूं ऐसे में मेरी कविता की भाषा किसी एक जगह की नहीं है। भाषा में कोई शब्द अश्लील नहीं होता है।

पुस्तक ‘गद्य का पानी’ का लोकार्पण

तीसरे सत्र में नीलेश रघुवंशी की डायरी विधा में लिखी गई पुस्तक ‘गद्य का पानी’ का लोकार्पण हुआ। इस पुस्तक में नीलेश रघुवंशी के लंबे समय से लिखे गए आलोचनात्मक लेख संजोए गए हैं। लोकार्पण के अवसर पर लीलाधर मंडलोई ने कहा, कोई भी कला इश्क की तरह होती है, जब आना होता है तभी आती है। नीलेश का आत्मस्वीकार जायज़ है। उनकी कविताओं में खोने की पीड़ा तथा पाने की दरकार साफ़ दिखाई देती है।

नीलेश रघुवंशी ने इस अवसर पर कहा, मैंने वर्षों से लिखे गए अपने लेखों को इस पुस्तक में संजोया है। मैं लिखती हूं क्योंकि लिखते-लिखते मुझे वह कुंजी मिल जाती है जिससे बाहर का रास्ता खुलता है। शम्पा शाह ने पुस्तक को रूसी कवि मरीना सोतायेवा को समर्पित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि संवेदना, ठहर पाना और खुद से प्रश्न करना ही लेखनी की खूबसूरती है। वहीं, विजय बहादुर सिंह ने कहा, मुग्धता और आलोचना में फर्क है। पाठक के रूप में अपने इंप्रेशन लिखना हर किसी का हक है। यही रचना को जीवंत बनाता है।

सीमा कपूर की आत्मकथा पर चर्चा

अगले सत्र में सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूँ गुज़री है अब तलक’ पर आरती ने उनके साथ बातचीत की। इस दौरान सीमा कपूर ने कहा कि ज़िन्दगी हमेशा खूबसूरत होती है यह हमारे ऊपर है कि हम उसे सुख के साथ जीते हैं या सुख के साथ। उन्होंने कहा कि स्त्री को कहने और अभिव्यक्त होने में सक्षम होना चाहिए। ज़िंदगी लंबी होती है और इसमें हमेशा कोई न कोई नया मोड़ सामने आता है। मुझे आज भी लगता है कि मैं किसी भी उम्र में नया काम शुरू कर सकती हूँ क्योंकि सबसे ज़रूरी है, खुद को जानना। जो हो चुका है उसे पकड़कर बैठे रहना ठीक नहीं।

सीमा कपूर ने कहा कि कोई भी आत्मकथा, दूसरी आत्मकथा का जवाब नहीं होती। मैंने लिखना तब शुरू किया, जब औरतों की आत्मकथाएँ लिखी ही नहीं जा रही थीं। यह अलग बात है कि उसे छपकर आने में समय लगा।

काव्य-संध्या के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

पाँचवे सत्र में पराग मांदले के कहानी-संग्रह ‘बाकी सब तो माया है’ पर चर्चा हुई। सत्र में लेखक के साथ मनोज कुलकर्णी और हेमन्त देवलेकर बतौर वक्ता मौजूद रहे। बातचीत के दौरान पराग मांदले ने कहा, कई बार हम परिस्थितियों में पीछे हटना नहीं चाहते, लेकिन यह मजबूरी बन जाती है। ऐसे क्षणों में पीछे हटना ही आगे बढ़ने की नई ऊर्जा और उत्साह का रास्ता खोलता है। मनोज कुलकर्णी ने कहा, विपरीत धारा में कुछ हासिल करना आसान नहीं होता। एक कहानीकार के रूप में आपको लगातार बदलना पड़ता है।

इसके बाद काव्य संध्या में भोपाल और अन्य शहरों से आए प्रतिष्ठित कवियों ने कविता पाठ किया। सुप्रसिद्ध कवि पवन करण और कवयित्री श्रुति कुशवाहा ने अपनी कविताओं के ज़रिए वर्तमान राजनीतिक स्थितियों को उकेरा। वरिष्ठ कवि कुमार अंबुज, सविता भार्गव, नीलेश रघुवंशी, वसंत सकरगाए की सशक्त कविताओं ने इस काव्य संध्या को सार्थकता प्रदान की। अन्य कवियों की कविताओं को भी खूब सराहा गया। बता दें कि ‘किताब उत्सव’ शृंखला की शुरुआत राजकमल प्रकाशन के 75वें स्थापना वर्ष में भोपाल से ही हुई थी और इस बार राजधानी में यह तीसरा आयोजन था। इसका उद्देश्य पाठकों और लेखकों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना है।

Rajkamal Prakashan, Bhopal Kitab Utsav

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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