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मध्यप्रदेश महिला बाल विकास विभाग में भर्ती घोटाला, न अनुभव न योग्यता उसके बावजूद पुरुषों के हाथों में सौंपी कमान, टेंडर पर उठे सवाल

Written by:Sushma Bhardwaj
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जिला स्तरीय हब के लिए समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट, फाइनेंस स्पेशलिस्ट, अकाउंट सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत कई पदों  पर भर्तियां की गई हैं। मिशन शक्ति में महिलाओं के सशक्तिकरण का काम होना है लेकिन विभाग ने 80 फीसदी कर्मचारियों के रूप में पुरुष आवेदकों को चयनित कर लिया।
मध्यप्रदेश महिला बाल विकास विभाग में भर्ती घोटाला, न अनुभव न योग्यता उसके बावजूद पुरुषों के हाथों में सौंपी कमान, टेंडर पर उठे सवाल

मध्यप्रदेश महिला बाल विकास विभाग में आजीविका मिशन जैसा भर्ती घोटाला सामने आया है। केंद्र सरकार की मिशन शक्ति योजना में सभी जिलों के लिए महिला हब बनाया गया है, इसके लिए जिला मिशन समन्वयक समेत कर्मचारियों की भर्ती की जानी थी। विभाग ने मुंबई की कंपनी टी एंड एम को आउटसोर्सिंग पर भर्ती का ठेका दे दिया। कंपनी ने मनमाफिक ढंग से कर्मचारियों की भर्ती कर ली। चयनित लोगों से लाखों रुपए वसूलने के आरोप हैं। भर्ती में न योग्यता का परीक्षण किया गया न ही अनुभव को परखा गया और नियुक्ति दे दी गई, हैरान करने वाली बात यह है कि महिलाओं के इस विभाग में ज्यादातर निययुक्ति पुरुषों को ही दी गई।  मामले की शिकायत लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू के साथ मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को की गई है वही भर्ती को लेकर विभाग के आला अधिकारी भी चुप हैं।

कई पदों पर चयन

जिला स्तरीय हब के लिए समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट, फाइनेंस स्पेशलिस्ट, अकाउंट सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत कई पदों  पर भर्तियां की गई हैं। मिशन शक्ति में महिलाओं के सशक्तिकरण का काम होना है लेकिन विभाग ने 80 फीसदी कर्मचारियों के रूप में पुरुष आवेदकों को चयनित कर लिया।

फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र

चयनित अधिकतर आवेदकों के पास महिलाओं के डोमेन में काम करने के वास्तविक अनुभव नहीं थे। इसके बावजूद कंपनी ने बगैर परीक्षण किए आवेदकों से सांठगांठ कर नियुक्ति कर दीं। ऐसे तमाम महिला आवेदक जिन्हें बालिका गृहों, वन स्टॉप सेंटर और स्वाधार गृह में काम करने के अनुभव थे उनके फार्म तक निरस्त कर दिए गए।

जल्दबाजी में नियुक्ति 

कंपनी ने आवेदकों को 19 मई रविवार को दस्तावेज परीक्षण के लिए मेल किए और अगले दिन 12 बजकर 30 मिनिट पर भोपाल बुलाया। यानि साफ समझा जा सकता था कि इतने कम समय में आखिर आवेदक दूर दराज से कैसे भोपाल पहुंचते। ऐसे मे ज्यादातर आवेदक पहुँच ही नहीं पाए। इस मामले की शिकायत आयुक्त कार्यालय को की गई लेकिन स्थापना संयुक्त संचालक ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि विभाग कोई भर्ती नही कर रहा जबकि कंपनी विभाग के नाम का खुलकर उपयोग कर रही थी।

पहले से ही किया गया सब सेट 

आयुक्त कार्यालय द्वारा टी एंड एम कंपनी को सुनियोजित तरीके से भर्ती का काम दिया गया ताकि प्रदेश भर से करोड़ों की वसूली की जा सके। नियमानुसार नई योजना के लिए कंपनियों से निविदा बुलाई जानी चाहिए थी लेकिन अफसरों ने बगैर टेंडर के ही कंपनी को यह काम दे दिया। इस पूरे मामलें में आवेदक हरीश शर्मा, मोना केवट, पंकज अहिरवार आदि ने शिकायत दर्ज करवाते हुए जांच की मांग की है।

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