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RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की फ़ीस भरेगी सरकार, सीएम डॉ मोहन यादव ट्रांसफर करेंगे 489 करोड़ रुपये

Written by:Atul Saxena
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वर्तमान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत प्रदेश में लगभग 8.50 लाख बच्चे अशासकीय स्कूलों में निःशुल्क अध्ययनरत होकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है।
RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की फ़ीस भरेगी सरकार, सीएम डॉ मोहन यादव ट्रांसफर करेंगे 489 करोड़ रुपये

शासकीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दे रही मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों की भी फ़ीस जमा करती है, हर साल की तरह इस साल भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ये फ़ीस प्राइवेट स्कूलों के खातों में ट्रांसफर करेंगे।

मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत अशासकीय विद्यालयों में निःशुल्क अध्ययन करने वाले बच्चों की 489 करोड़ रुपये फीस प्रतिपूर्ति की राशि सिंगल क्लिक से सीधे स्‍कूलों के खातों में ट्रांसफर करेंगे। ये  कार्यक्रम हरदा जिले के खिरकिया नगर में 29 सितम्बर, 2025 को होगा।

8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस दी जायेगी

राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर मिशन संचालक हरसिमरन प्रीत कौर ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वर्ष 2023-24 के अशासकीय विद्यालयों के प्रेषित प्रस्ताव पर नियमानुसार पोर्टल से जनरेटेड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के माध्यम से फीस प्रतिपूर्ति की कार्यवाही की गयी है। प्रदेश के 20 हजार 652 अशासकीय विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नि:शुल्क अध्ययनरत करीब 8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति की जायेगी।

19 लाख बच्चे अब तक हो चुके लाभान्वित

उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को उनके ग्राम, वार्ड अथवा पड़ोस में स्थित स्कूल की प्रथम प्रवेशित कक्षा की न्‍यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश दिये जाने का प्रावधान है। पूर्व के वर्षों में प्रवेशित छात्रों की संख्या को देखा जाये तो सत्र 2011-12 से लागू इस प्रावधान के तहत अशासकीय स्कूलों में नि:शुल्‍क अध्‍ययन से लगभग 19 लाख बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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