पश्चिम मध्य रेल भोपाल मंडल के रेलवे सुरक्षा बल द्वारा डीआरएम पंकज त्यागी के मार्गदर्शन एवं वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त डॉ अभिषेक के नेतृत्व में “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में खोए हुए और असहाय बच्चों की सुरक्षा और उनके परिवारों से मिलाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान आरपीएफ की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत उठाये जा रहे कदम
बच्चों की सुरक्षा: वर्ष 2025 में 250 बच्चों को रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षित बचाया। इन बच्चों में से अधिकांश खो गए थे या उनके परिवारों से अलग हो गए थे।
परिवारों से मिलाया: सभी बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया। आरपीएफ ने बच्चों के परिवारों को ढूंढने के लिए विशेष प्रयास किए और उन्हें सुरक्षित घर वापस पहुंचाया।
जागरूकता अभियान: आरपीएफ ने बच्चों की सुरक्षा के बारे में जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान में लोगों को बच्चों की सुरक्षा के महत्व के बारे में बताया गया और उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया गया।
महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि आरपीएफ का ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते बच्चों की सुरक्षा और उनके परिवारों से मिलाने में महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका निभा रहा है। आरपीएफ इस अभियान को और भी विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार है।
क्या है ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा देशभर में चलाया जाने वाला एक मिशन है, इस अभियान की सफलता ने न सिर्फ बिछड़ों को मिलाया बल्कि परिवार और बच्चों में आई गलतफहमियों को भी दूर किया। इस अभियान का लक्ष्य भारतीय रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में संकटग्रस्त या खोए हुए बच्चों की पहचान करना और उन्हें बचाना है, साथ ही रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में फंसे या खोए हुए बच्चों, खासकर जो भागे हुए, बिछड़े हुए या शोषण के शिकार होते हैं, को बचाना और उनके परिवारों से मिलाना है, ताकि उन्हें बाल श्रम, भीख या अन्य अपराधों से बचाया जा सके, जिसके लिए चाइल्ड हेल्प डेस्क और ट्रैक चाइल्ड पोर्टल जैसी व्यवस्थाएँ भी हैं। ताकि उन्हें बाल श्रम, तस्करी और अन्य शोषण से बचाया जा सके और उनके परिवारों से मिलाया जा सके; इस मिशन के तहत RPF हजारों बच्चों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर जिला बाल कल्याण समितियों के माध्यम से उनके माता-पिता तक पहुंचाता है।





