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सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक में कटेंगे लाखों पेड़! कांग्रेस हमलावर, उमंग सिंघार ने लगाया आदिवासी अधिकारों के हनन का आरोप

Written by:Shruty Kushwaha
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विपक्ष का आरोप है कि परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई होगी और इससे आदिवासी क्षेत्रों की पर्यावरणीय और सामाजिक संरचना प्रभावित होगी। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर वन क्षेत्र के नुकसान और आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए परियोजना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक में कटेंगे लाखों पेड़! कांग्रेस हमलावर, उमंग सिंघार ने लगाया आदिवासी अधिकारों के हनन का आरोप

Umang Singhar

मध्यप्रदेश विधानसभा में उठे मुद्दे के बाद सिंगरौली जिले के धिरोली कोल ब्लॉक में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर आदिवासी अंचल में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जंगलों पर हमला दरअसल आदिवासी धरोहर पर प्रहार है और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई आने वाली पीढ़ियों के साथ खिलवाड़ है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र को खनन के लिए अनुमति दी गई है। उनके अनुसार इस परियोजना के लिए लगभग 5.70 लाख पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है और सैकड़ों हेक्टेयर वनभूमि उजाड़ी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं, जबकि बदले में प्रतिपूरक पौधारोपण का दावा किया जा रहा है लेकिन जमीन पर कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहा है।

सिंगरौली जिले में काटे जाएंगे लाखों पेड़

सिंगरौली जिले में धिरौली कोल ब्लॉक को लेकर पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों का विवाद छिड़ा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि  धिरौली कोल ब्लॉक के लिए सरकार ने विधानसभा में खुद स्वीकार किया है कि 5.70 लाख पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है। इसमें 345 हेक्टेयर वनभूमि उजाड़ी जा रही है, जबकि 1,45,274 पेड़ों की कटाई को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि  हजारों पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। बदले में सरकार लाखों पौधे रोपण का दावा करती है, लेकिन आज तक जमीन पर एक भी नया पौधा नहीं लगाया गया है।

कांग्रेस ने सरकार से किए सवाल

कांग्रेस नेता ने बीजेपी के विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या विकास का मतलब जंगलों का सफाया करना, स्थानीय आदिवासी समुदायों की सहमति और अधिकारों को कुचलना, प्रतिपूरक पौधारोपण की शर्तों का खुला उल्लंघन और कंपनियों को विनाश की खुली छूट देना है। उन्होंने चेतावनी दी कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई आने वाली पीढ़ियों के साथ खिलवाड़ है। बता दें कि यह कोल ब्लॉक अडाणी समूह को आवंटित है, जिसकी कुल भूमि में से बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र है। कांग्रेस और स्थानीय आदिवासी समुदाय का आरोप है कि यह कार्य वन अधिकार अधिनियम, पेसा और अन्य पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते हुए हो रहा है। ये भी आरोप लग रहे हैं कि इसके लिए ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई और पुलिस की मौजूदगी में कटाई जारी है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार से सवाल कर रही है और आदिवासी इलाकों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का आरोप लगा रही है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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