भोपाल में अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम और राज्य सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह के हस्तक्षेप पर रोक लगा दी। कोर्ट ने राज्य शासन को इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, अवैध निर्माण मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत आदेश (स्टे) भी प्रभावहीन हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नगर निगम ने अदालत में बताई अपनी मजबूरी
नगर निगम की ओर से अदालत में कहा गया कि वह अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन विभिन्न कारणों से उसके हाथ बंधे हुए हैं। वहीं, सुनवाई के दौरान नगर निगम की रिपोर्ट पर भी सवाल उठे। आरोप लगाया गया कि निगम ने कोर्ट में वास्तविक कार्रवाई से अधिक दुकानों को सील करने की जानकारी दी। दावा किया गया कि जहां दो दुकानें सील की गई थीं, वहीं अदालत को करीब 100 दुकानों पर कार्रवाई होने की जानकारी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 सप्ताह में मांगी पूरी रिपोर्ट
इसी दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता को भी अदालत की नाराजगी का सामना करना पड़ा। मामले की अगली सुनवाई तक सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को तीन सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।






