भोपाल की एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में आज जिला कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। दरअसल रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हो सकती है। इस दौरान CBI दिल्ली AIIMS की दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर सकती है, जिस पर पूरे मामले की आगे की दिशा काफी हद तक निर्भर मानी जा रही है।
दरअसल सीबीआई ने यह जांच 25 मई 2026 को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अपने हाथ में ली थी। तब से एजेंसी मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल सबूत, फॉरेंसिक जांच और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। जांच की तय समय-सीमा पूरी होने के करीब है इसलिए कोर्ट में होने वाली कार्रवाई को कानूनी और जांच दोनों नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट क्यों मानी जा रही है अहम?
दरअसल ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में हुई थी। वहीं उस समय ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था जबकि मायके वालों ने हत्या का आरोप लगाया था। पहले पोस्टमॉर्टम के बाद कई सवाल खड़े हुए थे। आरोप था कि जांच के दौरान कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल हुई जिम बेल्ट मेडिकल टीम के सामने पेश नहीं की गई थी। इसी वजह से मौत के कारण को लेकर विवाद और गहरा गया। बाद में हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली AIIMS के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया। मेडिकल बोर्ड ने सिर्फ पोस्टमॉर्टम ही नहीं किया, बल्कि घटनास्थल का भी निरीक्षण किया और वैज्ञानिक तरीके से सभी जरूरी जांच पूरी की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 11 पेज की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है इसलिए उसके निष्कर्षों पर अंतिम टिप्पणी करना फिलहाल सही नहीं होगा। लेकिन माना जा रहा है कि यही रिपोर्ट आगे की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी नजर
दरअसल सीबीआई ने 25 मई को आधिकारिक रूप से यह केस अपने हाथ में लिया था। कानून के मुताबिक एजेंसी को तय समय के भीतर जांच पूरी कर अदालत में चालान दाखिल करना होता है। अगर ऐसा तय अवधि में नहीं हो पाता तो आरोपी पक्ष को डिफॉल्ट जमानत मांगने का कानूनी अधिकार मिल सकता है। यही वजह है कि आज की सुनवाई सिर्फ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक सीमित नहीं मानी जा रही बल्कि जांच की प्रगति और आगे की पूरी कानूनी प्रक्रिया के लिए भी अहम है।






