नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के कमजोर वर्गों, आदिवासियों, दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए विभिन्न आयोग भाजपा सरकार के कार्यकाल में पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं। इनमें राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग, राज्य महिला आयोग, राज्य अल्पसंख्यक आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, मानव अधिकार आयोग और सूचना आयोग शामिल हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य के कुल आठ प्रमुख आयोगों में से सिर्फ तीन..पिछड़ा वर्ग आयोग, सूचना आयोग और मानवाधिकार आयोग में ही अध्यक्ष नियुक्त हैं। लेकिन इनमें सदस्यों की भारी कमी है। बाकी बचे पांच आयोग वर्षों से बिना अध्यक्ष और सदस्यों के एवं बिना कर्मचारियों के संचालित हो रहे हैं।  उन्होंने सरकार से मांग की कि तुरंत इन आयोगों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति की जाए और उनकी वेबसाइट भी शुरू की जाए।

कांग्रेस ने विभिन्न आयोगों को लेकर सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने कहा है कि बीजेपी शासन काल में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग, राज्य महिला आयोग, राज्य अल्पसंख्यक आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, मानव अधिकार आयोग और सूचना आयोग निष्क्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोग एक कोर्ट की तरह काम करते हैं जिनके पास सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं। यह शिकायतों को सुनते हैं और बिना खर्च एवं बिना किसी कोर्ट या पुलिस को शामिल किए उसका निपटारा करते हैं। सिंघार ने आरोप लगाया कि पर भाजपा सरकार ने इन आयोगों का भट्टा बैठा दिया है, जो सामाजिक न्याय पर एक गहरा प्रहार है।

उमंग सिंघार ने की ये मांग 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सिर्फ तीन आयोगों में ही अध्यक्ष नियुक्त हैं लेकिन वहां भी सदस्यों की संख्या कम है। बाकी पांच आयोग कई सालों से बिना अध्यक्ष और सदस्यों, बिना कर्मचारियों के संचालित हो रहे हैं। जैसे बिना जज के कोर्ट। उन्होंने कहा कि डिजिटल भाजपा सरकार में इन आयोगों की वेबसाइटें तक बंद हैं और आयोगों की लगभग 2 लाख से ज़्यादा शिकायतें लंबित पड़ी हैं। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को तत्काल इन आयोगों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति करनी चाहिए, उनकी वेबसाइटों को शुरू करना चाहिए और पारदर्शी व जवाबदेह कार्यप्रणाली सुनिश्चित करनी चाहिए।