भोपाल स्मार्ट सिटी को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि 342 एकड़ जमीन पर रजिस्ट्री और विकास की अनुमति का संकट बना हुआ है। वहीं, 19 प्रस्तावित सड़कों में से 10 साल में सिर्फ एक सड़क बन पाई है। उन्होंने सवाल किया कि स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद परियोजना की यह स्थिति क्यों है।
कांग्रेस नेता ने लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से बने स्मार्ट हाट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह पिछले पांच साल से बंद पड़ा है। यहां बनी 417 दुकानों में से करीब 95 प्रतिशत दुकानें खाली हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा कि जब परियोजना पर इतना पैसा खर्च किया गया तो आम लोगों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से विकास के दावों के बजाय जमीनी हकीकत पर जवाब देने की मांग की है।
भोपाल स्मार्ट सिटी को लेकर उठते सवाल
भोपाल स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पुराने टीटी नगर क्षेत्र की करीब 342 एकड़ जमीन को विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत सड़कें, आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं विकसित की जानी थीं। भोपाल को वर्ष 2016 में केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन के पहले चरण में शामिल किया गया था। परियोजना का उद्देश्य शहर में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा देना था।
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हालांकि, जमीन से जुड़े मामलों, अतिक्रमण और विकास कार्यों में देरी के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं। स्मार्ट हाट भी इसी परियोजना का हिस्सा है जहां 417 दुकानों का निर्माण किया गया। लेकिन इन दुकानों के खाली रहने और बाजार के बंद होने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसी मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और संबंधित विभाग से पूछा कि जमीन की रजिस्ट्री और विकास अनुमतियों से जुड़ी समस्याएं कब दूर होंगी और स्मार्ट हाट को चालू करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
