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भोपाल के सरकारी स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट निर्माण पर उठे सवाल, उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा 3.63 करोड़ का हिसाब

राजधानी के 124 स्कूलों में स्वीकृत शौचालयों को लेकर सामने आई स्थिति ने निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। पोर्टल पर दर्ज प्रगति और स्कूलों में मिली स्थिति के बीच अंतर की जांच की जा रही है।
Umang Singhar

मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए बनाए जा रहे शौचालयों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद कई स्कूलों में छात्राओं को जरूरी सुविधा पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भोपाल के 124 सरकारी स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट निर्माण के लिए जिला शिक्षा केंद्र की ओर से सत्र 2025-26 में 3.63 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। प्रत्येक टॉयलेट के लिए लगभग 2.93 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। वहीं, सरकारी पोर्टल पर 112 टॉयलेट का निर्माण पूरा दर्ज किया गया है।

उमंग सिंघार ने लगाए आरोप 

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि जमीनी स्थिति में कई जगह निर्माण कार्य अधूरा मिला। कहीं टॉयलेट में सीट नहीं है तो कहीं सिर्फ ढांचा तैयार कर प्लास्टर किया गया है। कुछ स्कूलों में दरवाजे तक नहीं लगाए गए हैं। इसके चलते पोर्टल पर काम पूरा दर्ज होने के बावजूद छात्राओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस नेता ने सरकार से सवाल किया कि जब निर्माण के लिए बजट जारी हुआ और पोर्टल पर काम पूरा दिखाया गया तो फिर स्कूलों में अधूरे निर्माण की स्थिति कैसे बनी। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

बेटियों की सुविधा को लेकर सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सिर्फ बजट आवंटित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड और स्कूलों की वास्तविक स्थिति में अंतर है जिसका असर सीधे छात्राओं पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से 3.63 करोड़ रुपये के इस्तेमाल का हिसाब सार्वजनिक करने और निर्माण में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।

क्या है पूरा मामला

जिला शिक्षा केंद्र ने 2025-26 सत्र में भोपाल के 124 सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए नए शौचालय बनाने की मंजूरी दी थी। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, इनमें से 112 का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन इन कार्यों की मौके पर स्थिति अलग मिलने की बात सामने आई है। पड़ताल के दौरान कुछ स्कूलों में टॉयलेट के अंदर सीट नहीं मिली, जबकि कुछ जगह सिर्फ निर्माण का ढांचा तैयार था। कहीं प्लास्टर के बाद काम आगे नहीं बढ़ा तो कुछ स्थानों पर दरवाजे भी नहीं लगाए गए थे। ऐसे में अब सवाल यह है कि अधूरे निर्माण के बावजूद इन शौचालयों को विभागीय पोर्टल पर पूर्ण कैसे दर्ज किया गया। इन निर्माण कार्यों की निगरानी जिला शिक्षा केंद्र के इंजीनियरों की जिम्मेदारी थी। मामले में जिला परियोजना समन्वयक सिद्धार्थ जैन ने जांच टीम गठित किए जाने की जानकारी दी है। उनका कहना है कि जांच में जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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