मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ को लेकर बीजेपी सरकार से सवाल किए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे “नारी के नाम पर राजनीतिक प्रबंधन” बताया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात तो की जा रही है, लेकिन इसके प्रावधान और क्रियान्वयन पर अब भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण कोई नई पहल नहीं है। 1992-93 में राजीव गांधी द्वारा 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से इसकी मजबूत नींव रखी गई थी। आज देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं पंचायत और नगर निकायों में निर्वाचित हैं तथा लगभग 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का है। इसी से साथ उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार से पूछा है कि उन्हें इसपर स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि प्रदेश की महिलाओं को वास्तविक और समावेशी प्रतिनिधित्व कब और कैसे मिलेगा।
उमंग सिंघार ने किए सवाल
उमंग सिंघार ने ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ को लेकर सवाल उठाते हुए इसे “नारी के नाम पर राजनैतिक प्रबंधन” करार दिया है। उन्होंने कहा कि “इस व्यवस्था में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग महिलाओं के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती। क्या देश और प्रदेश की इतनी बड़ी आबादी वाली महिलाओं को इस व्यवस्था से बाहर रखना सामाजिक न्याय है?”
ओबीसी आरक्षण पर बीजेपी से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष ने आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने पूछा है कि “परिसीमन की कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं है। ऐसे में क्या यह आरक्षण मध्यप्रदेश के 2028 विधानसभा चुनाव में लागू हो पाएगा।” उमंग सिंघार ने यह भी सवाल किया कि सरकार 2027 की जातिगत जनगणना के परिणाम का इंतजार क्यों नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा है कि बिना वास्तविक सामाजिक आंकड़ों के इतना बड़ा निर्णय लेना न्यायसंगत नहीं है और क्या बीजेपी OBC वर्ग की वास्तविक हिस्सेदारी सामने आने से बचाने की कोशिश में है। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा है कि उन्हें स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि प्रदेश की महिलाओं को वास्तविक और समावेशी प्रतिनिधित्व कब और कैसे मिलेगा।






