मध्य प्रदेश में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामले सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस बीमारी की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वो सरकार को समय रहते चेता रहे हैं कि जीबीएस की दस्तक गंभीर चिंता का विषय है और इसे लेकर कारगर कार्रवाई की आवश्यकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ‘सरकार मामले की गंभीरता को समझें, संबंधित विभागों को स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी करें, पानी की गुणवत्ता, स्वास्थ्य निगरानी और त्वरित उपचार सुनिश्चित करें ताकि प्रदेश में कोई और त्रासदी न दोहराई जाए।’ इंदौर जल त्रासदी के बाद कांग्रेस ने कहा है कि इस बीमारी की आहट को गंभीरता से लिए जाने की ज़रूरत है।
उमंग सिंघार ने की सरकार से उचित कार्रवाई की मांग
उमंग सिंघार ने कहा कि नीमच जिले के मनासा में संक्रमण की चपेट में आए दो बच्चों की मौत के बाद मंदसौर जिले के गरोठ और सुवासरा में GBS के मरीजों की पुष्टि यह संकेत देती है कि हालात गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि ये एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित विभागों को स्पष्ट और सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने पानी की गुणवत्ता, स्वास्थ्य निगरानी और त्वरित उपचार सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में किसी भी तरह की नई त्रासदी को रोकना शासन की जिम्मेदारी है।
जीबीएस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम दुर्लभ लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral nerves) पर हमला कर देता है। ये तंत्रिकाएं दिमाग और रीढ़ की हड्डी से शरीर के बाकी हिस्सों तक संकेत पहुंचाती हैं। इससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता, झुनझुनी और गंभीर मामलों में पैरालिसिस भी हो सकता है। यह बीमारी आमतौर पर किसी इन्फ़ेक्शन के कुछ दिन या हफ्तों बाद शुरू होती है। जीबीए संक्रामक रोग नहीं है और वंशानुगत भी नहीं है। इससे बचने के लिए साफ सफाई रखना, अच्छे से हाथ धोना, साफ और उबला पानी पीना, अच्छा सैनिटेशन बनाए रखना जरूरी है। इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और सही इलाज लेना बेहद आवश्यक है।





