मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के ग्राम जगदीशपुर में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में विशेष कैबिनेट बैठक सम्पन्न हुई। “समानता और न्याय की भावना को समर्पित” इस बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को आधिकारिक मंजूरी दी गई। इसके अलावा श्रम संहिता, निजी विश्वविद्यालय संशोधन, नागरिक सुरक्षा और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विधेयकों को भी स्वीकृति दी गई।
इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह कानून रम-रहीम दोनों के लिए एक समान होगा। अब इस बिल को मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किया जाएगा।बिल को लेकर प्रदेशभर से 10 लाख लोगों के सुझाव मिले थे। इसमें 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने कहा UCC लागू होना चाहिए, जबकि 40 प्रतिशत पुरुषों ने भी समर्थन दिया।मध्यप्रदेश देश का चौथा राज्य होगा जहां समान नागरिक कानून लागू होने जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस से भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक का विरोध ना करके समर्थन करने की अपील की।
कैबिनेट बैठक प्रारंभ होने के पहले मुख्यमंत्री यादव ने ‘धरोहर’ प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। प्रदर्शनी में प्रदेश के जनजातीय नायकों, सुशासन एवं शौर्य के प्रतीक महान शासकों तथा राष्ट्रभक्त विभूतियों के प्रेरक चित्र प्रदर्शित किए गए। लगभग 10 करोड़ की लागत से नवसंवर्धित जगदीशपुर दुर्ग का लोकार्पण किया। साथ ही दुर्ग के गौरवशाली इतिहास तथा राज्य शासन द्वारा किए गए संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों पर आधारित विशेष फिल्म का प्रदर्शन भी देखा।
जगदीशपुर में हुई MP की 8वीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक
बता दें कि अबतक जबलपुर (शक्ति भवन), दमोह (सिंग्रामपुर के वीरांगना रानी दुर्गावती के सम्मान), महेश्वर (लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी ), इंदौर के राजवाड़ा (लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का 300 वें जयंती वर्ष), पचमढ़ी (राजभवन में राजा भभूत सिंह के शौर्य को समर्पित), खजुराहो (महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर) और बड़वानी (जनजातीय बहुल क्षेत्र भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी) में कैबिनेट बैठक हो चुकी है । आज भोपाल के ग्राम जगदीशपुर में 8वीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक हुई।
समान नागरिक संहिता कानून के प्रमुख बिन्दु
- मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के निवासियों के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के उद्देश्य से ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) का एक ऐतिहासिक ड्राफ्ट तैयार किया है। यह कोड उत्तराखंड (2024), गुजरात (2026) और असम (2026) के यूनिफॉर्म सिविल कोड के गहन अध्ययन और उनके मार्गदर्शन से तैयार किया गया है।
- पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार देने के साथ-साथ यह कोड उन धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक प्रथाओं की साफ तौर पर सुरक्षा करता है जो सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हैं।
- यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों (जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया) पर लागू नहीं होगा।
- जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है।
- यह कोड सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है।
- विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है।
शादी-तलाक को लेकर : कानून के तहत मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है।यदि पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है। शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में ‘MP ई-नगर पालिका पोर्टल’ और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए ‘निकाह हलाला’ जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।
बच्चों के लिए: विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा हुए सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा। कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले “बच्चे का हित और सर्वांगीण भलाई” ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगी।
बेटा-बेटी की वसीयत के लिए : बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है, और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे। बिना वसीयत मरे व्यक्ति की संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके (Gradual Scheme) से बांटा जाएगा। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो ‘एस्चीट’ सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी। एक नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी 100% संपत्ति (स्वयं-अर्जित और पैतृक दोनों) वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी ‘अनिवार्य उत्तराधिकार’ की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं। यह प्रक्रिया ‘भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925’ के तहत संचालित होगी।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता/अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा। इनसे पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है। बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज़्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और ₹25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है।






