बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन सिर्फ नामांकन का दिन नहीं रहा, बल्कि नए राजनीतिक संकेतों की चर्चा का केंद्र भी बन गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसी दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी दावों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई।
विधानसभा में नामांकन दाखिल करने वालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार शामिल रहे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने राजनीतिक महत्व और बढ़ा दिया।
सहनी ने उठाए राजनीतिक मंशा पर सवाल
मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के सवाल पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने सत्तारूढ़ गठबंधन, खासकर BJP की रणनीति पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ बिहार में नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी कथित तौर पर ऑपरेशन लोटस जैसी रणनीति के जरिए सहयोगी दलों को कमजोर करती रही है।
“भाजपा का असली लक्ष्य जदयू को एक राजनीतिक शक्ति के रूप में खत्म करना है और नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की योजना उसी दिशा में उठाया गया अगला कदम हो सकता है।”- मुकेश सहनी
सहनी ने यह भी कहा कि उनकी ओर से पहले भी यह आशंका जताई गई थी कि भाजपा नीतीश कुमार को लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहने देगी। अब राज्यसभा को लेकर चल रही चर्चाओं को उन्होंने उसी कथित रणनीति का हिस्सा बताया।
नामांकन के साथ बढ़ी अटकलें, पर आधिकारिक तस्वीर पर नजर
राज्यसभा नामांकन की प्रक्रिया में कई प्रमुख नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने स्वाभाविक रूप से राजनीतिक व्याख्याओं को जगह दी है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम में औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल होने का तथ्य स्पष्ट है, लेकिन मुख्यमंत्री की आगे की भूमिका पर बहस राजनीतिक बयानों के आधार पर आगे बढ़ रही है।
फिलहाल बिहार की सियासत में दो समानांतर रेखाएं दिख रही हैं-एक तरफ नामांकन की प्रक्रियात्मक राजनीति, दूसरी तरफ गठबंधन के भीतर शक्ति-संतुलन को लेकर उठते सवाल। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने के संकेत हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव और उससे जुड़े समीकरण राज्य की व्यापक राजनीति पर असर डालते हैं।





