क्या बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के मोड़ पर है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य की राजनीति से दिल्ली जाने के निर्णय ने यही सवाल खड़ा कर दिया है। इसी बीच राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन दाखिल होना राजनीतिक संकेतों को और स्पष्ट करता दिख रहा है।
नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद जेडीयू कार्यकर्ताओं और कई नेताओं के बीच मायूसी की बात सामने आई है। पार्टी और सहयोगी हलकों में इसे बिहार की सियासत के एक लंबे अध्याय के खत्म होने जैसा बताया जा रहा है।
प्रतिक्रियाओं में सबसे चर्चित बयान प्लूरल्स पार्टी की चीफ पुष्पम प्रिया चौधरी का रहा। उन्होंने X पर नीतीश कुमार की पुरानी तस्वीर साझा करते हुए निजी और राजनीतिक, दोनों संदर्भों में अपनी बात रखी।
‘जिस राजनीति को बचपन से मैंने देखा आज उसका अंत हो रहा है। अभिभावक, नेता और सीएम – तीनों रूप में आप रोल मॉडल रहे। आपने सभी भूमिकाओं को जितना बन पड़ा उतना निभाया, पर आपकी निष्ठा में कोई कमी नहीं रही। अलविदा सीएम ‘सुशासन’ बाबू! स्वस्थ रहें और अपना ध्यान रखें।’ — पुष्पम प्रिया चौधरी
जिस राजनीति को बचपन से मैंने देखा आज उसका अंत हो रहा है। अभिभावक, नेता और सीएम – तीनों रूप में आप रोल मॉडल रहे। आपने सभी भूमिकाओं को जितना बन पड़ा उतना निभाया, पर आपकी निष्ठा में कोई कमी नहीं रही। अलविदा सीएम ‘सुशासन’ बाबू! स्वस्थ रहें, और अपना ध्यान रखें। @NitishKumar pic.twitter.com/wO7rEsowM9
— Pushpam Priya Choudhary (@pushpampc13) March 5, 2026
पटना में नामांकन: अमित शाह मौजूद, एनडीए के पांच उम्मीदवार मैदान में
गुरुवार, 5 मार्च को पटना में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहे। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नामांकन दाखिल करने पर बधाई भी दी।
उसी मौके पर एनडीए की ओर से कुल पांच उम्मीदवारों ने नामांकन भरा। इनमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार, केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता रामनाथ ठाकुर, तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के उपेन्द्र कुशवाहा शामिल रहे।
नामांकन के दौरान मौजूदगी और उम्मीदवारों की सूची को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह बिहार से दिल्ली तक शक्ति-संतुलन और आगामी संसदीय रणनीति के संकेत देती है।
दिल्ली शिफ्ट के फैसले पर बढ़ी चर्चा
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के निर्णय की चर्चा केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं रही। विपक्षी और गैर-पारंपरिक राजनीतिक मंचों से भी इस पर प्रतिक्रियाएं आईं। पुष्पम प्रिया चौधरी की टिप्पणी ने इस बहस को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों आयाम दिए हैं।
उन्होंने अपने संदेश में साफ कहा कि जिस राजनीति को वह बचपन से देखती आईं, उसका अंत होता दिख रहा है। साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार के स्वस्थ जीवन की कामना भी की।
फिलहाल तत्काल राजनीतिक फोकस राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया पर है, लेकिन बिहार में यह भी देखा जा रहा है कि नीतीश कुमार की सक्रिय भूमिका अब किस स्वरूप में दिल्ली की राजनीति में सामने आती है। राज्य से राष्ट्रीय स्तर की ओर उनका यह कदम आने वाले समय में गठबंधन राजनीति की दिशा तय करने में असर डाल सकता है।






