राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन, 5 मार्च 2026 की सुबह बिहार की राजनीति में नया तनाव दिखा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज होते ही जेडीयू कार्यकर्ता पटना स्थित सीएम आवास के बाहर पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि वे नीतीश कुमार को बिहार से दिल्ली भेजने के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक अटकल नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के खिलाफ रची जा रही साजिश है। इसी दौरान कई कार्यकर्ताओं ने यह आरोप भी दोहराया कि शराब माफिया और पार्टी के कुछ लोग मिलकर उन्हें राज्यसभा भेजने की कोशिश कर रहे हैं।
नामांकन के दिन बढ़ी राजनीतिक हलचल
राज्यसभा नामांकन का यह आखिरी दिन होने की वजह से चर्चा और तेज रही। सुबह-सुबह जुटे कार्यकर्ताओं ने कहा कि नीतीश कुमार के अलावा कोई दूसरा चेहरा उन्हें स्वीकार नहीं है। विरोध का केंद्र सिर्फ एक बात रही—बिहार की कमान बीच कार्यकाल में किसी और को न सौंपी जाए।
प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना था कि 2025 से 2030 के लिए मिला जनादेश नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू होना चाहिए। उनके मुताबिक कार्यकर्ताओं ने लंबे समय की मेहनत के बाद यह राजनीतिक स्थिति बनाई है, इसलिए बीच में नेतृत्व बदलने की बात स्वीकार्य नहीं है।
‘जो खबर चली है कि मुख्यमंत्री जी दिल्ली जाएंगे, उससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। किसी के घर होली नहीं मनी है, हमारी होली खराब हो गई।’ — जेडीयू से जुड़े एक प्रदर्शनकारी नेता
‘नीतीश रहें मुख्यमंत्री, राज्यसभा जाएं निशांत’
प्रदर्शन के दौरान एक और मांग खुलकर सामने आई। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर पार्टी को राज्यसभा के लिए किसी नाम पर जाना है, तो निशांत कुमार को भेजा जा सकता है और वे उसका स्वागत करेंगे। लेकिन नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का वे विरोध करते हैं।
यह रुख सिर्फ नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन और सरकार की दिशा से जोड़ा। उनका कहना था कि बिहार की बागडोर किसी दूसरे हाथ में देने का सवाल ही नहीं उठता। इसलिए मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार की निरंतरता जरूरी है।
नारेबाजी में एक ही संदेश
सीएम आवास के बाहर लगे नारों में एक लाइन बार-बार सुनाई दी—नीतीश कुमार के अलावा कोई मंजूर नहीं। इससे यह संकेत मिला कि राज्यसभा को लेकर चल रही चर्चा ने संगठन के जमीनी स्तर पर असहजता पैदा की है।
फिलहाल, विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं का रुख स्पष्ट है: नीतीश कुमार को दिल्ली नहीं, पटना में ही रहकर सरकार चलानी चाहिए। राज्यसभा नामांकन की प्रक्रिया के बीच यह विरोध जेडीयू के भीतर चल रही बेचैनी को खुलकर सामने ले आया है।






