भोपाल के AIIMS में महिला डॉक्टर की मौत से जुड़ा मामला अब संस्थान और स्थानीय प्रशासन से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर की जांची प्रक्रिया में पहुंच गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस प्रकरण में आधिकारिक दखल देते हुए AIIMS भोपाल, भोपाल पुलिस और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है।
आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, इस मामले में शिकायत 21 जनवरी 2026 को प्राप्त हुई थी और इसे 2 मार्च 2026 को विचार के लिए लिया गया। शिकायत में कहा गया कि AIIMS भोपाल में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. एसबी वर्मा की 5 जनवरी 2026 को मौत हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौत से पहले डॉक्टर मानसिक दबाव और कार्यस्थल के कथित विषाक्त माहौल से गुजर रही थीं।
शिकायत में क्या-क्या आरोप दर्ज हैं
दर्ज शिकायत के अनुसार, ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. मोहम्मद यूनुस के व्यवहार को लेकर संस्थान के भीतर तनावपूर्ण माहौल बना। शिकायतकर्ता ने आयोग से कहा कि डॉ. वर्मा ने अपनी मानसिक स्थिति और संस्थागत स्तर पर कथित लापरवाही को लेकर पहले भी कई ईमेल भेजे थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं हुआ।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शिकायत में अब तक FIR दर्ज न होने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह दावा भी किया गया कि पहले महिला डॉक्टरों से जुड़ी शिकायतों को दबाने की कोशिशें हुई थीं। इन आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन NHRC ने इन्हें जांच योग्य बिंदु मानते हुए औपचारिक रिपोर्ट तलब की है।
किन संस्थाओं को नोटिस, किस कानून के तहत कार्रवाई
आयोग ने AIIMS भोपाल के निदेशक, भोपाल पुलिस कमिश्नर और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत जारी किया गया है। इसी प्रावधान के आधार पर आयोग संबंधित सरकारी और संस्थागत पक्षों से तथ्यों, रिकॉर्ड, कार्रवाई की स्थिति और जवाबदेही से जुड़े बिंदुओं पर रिपोर्ट मांग सकता है।
NHRC ने स्पष्ट किया है कि मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए उसके पास सिविल कोर्ट जैसी जांच शक्तियां हैं। इसलिए इस मामले में मांगी गई रिपोर्ट केवल औपचारिक जवाब नहीं, बल्कि बिंदुवार और रिकॉर्ड-आधारित स्थिति स्पष्ट करने वाली होनी चाहिए।
“मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए आयोग को सिविल कोर्ट जैसी जांच शक्तियां प्राप्त हैं।” — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
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अब आगे क्या होगा
अब प्रक्रिया का अगला चरण संबंधित संस्थाओं की ATR पर निर्भर करेगा। आयोग के नोटिस के बाद AIIMS भोपाल प्रशासन को यह बताना होगा कि डॉक्टर की ओर से भेजे गए ईमेल या शिकायतों पर क्या आंतरिक कदम उठाए गए, किस स्तर पर जांच हुई, और किस अधिकारी ने क्या निर्णय लिया।
भोपाल पुलिस से अपेक्षा रहेगी कि वह FIR, प्रारंभिक जांच और कानूनी कार्रवाई की स्थिति आयोग के सामने रखे। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संस्थागत निगरानी, सेवा-संबंधी सुरक्षा प्रावधान और शिकायत निवारण तंत्र के संचालन को लेकर जवाब मांगा गया है।
यह मामला केवल एक मृत्यु की जांच तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और महिला डॉक्टरों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जैसे व्यापक सवाल भी इससे जुड़े हैं। NHRC के समक्ष रिपोर्ट जमा होने के बाद आयोग आगे की दिशा—अतिरिक्त पूछताछ, सिफारिश या अन्य वैधानिक कदम—तय करेगा। फिलहाल सभी संबंधित पक्षों को निर्धारित समय में अपना पक्ष और रिकॉर्ड प्रस्तुत करना है।






