मध्यप्रदेश शासन ने खाड़ी देशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एक विशेष 24×7 कंट्रोल रूम शुरू किया है। यह व्यवस्था नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में बनाई गई है और इसका उद्देश्य मौजूदा अप्रत्याशित परिस्थितियों के बीच जरूरतमंद लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना है।
घोषणा के अनुसार, राज्य के वे निवासी जो अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन या अन्य कारणों से खाड़ी देशों में हैं, यदि किसी तरह की मदद चाहते हैं तो सीधे कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ सूचना संग्रह की औपचारिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि सहायता समन्वय का सक्रिय माध्यम रहेगा।
भोपाल से 4 मार्च 2026 को जारी जानकारी में कहा गया कि कंट्रोल रूम प्राप्त मामलों को संबंधित केंद्रीय और अन्य एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए समन्वय करेगा। यानी जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार, भारत सरकार और संबंधित संस्थाओं के बीच संपर्क स्थापित कर सहायता प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
किसके लिए है यह सुविधा
यह सुविधा खास तौर पर उन मध्यप्रदेश निवासियों के लिए बनाई गई है जो फिलहाल खाड़ी देशों में मौजूद हैं। ऐसी स्थितियों में अक्सर स्थानीय स्तर की जानकारी, दस्तावेजी सहायता, संपर्क बिंदु या प्रशासनिक मार्गदर्शन की जरूरत पड़ती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली में केंद्रीय संपर्क केंद्र के रूप में यह कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है।
राज्य सरकार का फोकस यह है कि कोई भी व्यक्ति सहायता मांगने की स्थिति में असमंजस में न रहे—किस नंबर पर कॉल करना है, किस माध्यम से संदेश भेजना है, और जानकारी किसे देनी है, इसके लिए स्पष्ट संपर्क बिंदु उपलब्ध रहे।
आधिकारिक संपर्क विवरण
दूरभाष नंबर: 011-26772005
व्हाट्सऐप नंबर: 9818963273
ई-मेल: mphelpdeskgulf@gmail.com
सरकार ने अपील की है कि जरूरतमंद लोग उपलब्ध माध्यमों के जरिए अपनी स्थिति और आवश्यक सहायता का विवरण साझा करें, ताकि संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर उचित मदद उपलब्ध कराई जा सके।
कंट्रोल रूम को 24×7 मोड में स्थापित करने का मतलब यह भी है कि समय क्षेत्र और तात्कालिकता जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सहायता अनुरोधों पर सतत निगरानी रखी जा सके। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को मध्यप्रदेश के बाहर रह रहे नागरिकों के लिए संपर्क और सहायता का औपचारिक चैनल बताया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रभावित या सहायता चाहने वाले व्यक्तियों को सीधे उपरोक्त नंबरों और ई-मेल के माध्यम से संपर्क करना है। आगे की कार्रवाई संबंधित मामलों की प्रकृति के आधार पर भारत सरकार और अन्य संबद्ध एजेंसियों के समन्वय से की जाएगी।






