क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार हो रही है, या यह सिर्फ चुनावी मौसम की अटकलें हैं? बुधवार को यह सवाल पटना से दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना रहा, जब खबरें आईं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनता दल (यूनाइटेड) राज्यसभा भेज सकती है।
इसी के साथ एक और राजनीतिक संभावना जोड़ी गई—अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिल सकता है, जबकि उनके पुत्र निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि किसी भी सहयोगी दल ने नहीं की है। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ BJP नेता गिरिराज सिंह ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए ‘होली का मजाक’ बताया और साफ कहा कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री हैं।
“नीतीश कुमार जी ही मुख्यमंत्री हैं।” — गिरिराज सिंह
5 सीटें, अंतिम तारीख और बढ़ती राजनीतिक बेचैनी
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि बृहस्पतिवार, 5 मार्च है। समय सीमा नजदीक आने के साथ अटकलों का दायरा बढ़ा। BJP ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिनमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का नाम शामिल बताया गया है। राजग के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा को लगातार दूसरी बार राज्यसभा भेजे जाने की पुष्टि भी हो चुकी है।
इसके उलट JDU ने अब तक अपने उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की। यही खाली जगह अटकलों को बल देती रही। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच यह चर्चा भी रही कि 2005 से सत्ता में रहे नीतीश कुमार राज्यसभा के रास्ते ‘सम्मानजनक विदाई’ ले सकते हैं। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि चुनावी प्रदर्शन के आधार पर BJP राज्य में अपना मुख्यमंत्री चाह सकती है।
निशांत की एंट्री की घोषणा के बाद तेज हुई चर्चा
इस महीने की शुरुआत में 75वां जन्मदिन मना चुके नीतीश कुमार के बारे में यह चर्चा उस समय और तेज हुई, जब एक दिन पहले पार्टी ने कहा कि उनके पुत्र निशांत राजनीति में प्रवेश करेंगे। इससे पहले भी निशांत को सीधे राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें चली थीं। रिपोर्टों में उनकी उम्र करीब 40 वर्ष बताई गई और यह भी कहा गया कि वह अभी औपचारिक रूप से JDU में शामिल नहीं हुए हैं।
यानी घटनाक्रम केवल एक सीट या एक नाम तक सीमित नहीं है; यह गठबंधन संतुलन, उत्तराधिकार संकेत और 2025 से पहले के शक्ति-संदेश—तीनों को साथ लेकर चल रहा है। इसी वजह से बयानबाजी भी सामान्य से ज्यादा तीखी दिखी।
JDU कार्यकर्ताओं की चेतावनी, सहयोगियों की सतर्क भाषा
पटना में JDU से जुड़े एक कार्यकर्ता ने कहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की बात सुनकर लोग चिंतित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो आंदोलन होगा और बिहार में बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया दिख सकती है। एक युवा JDU कार्यकर्ता ने भी इसी तरह का दावा किया कि ऐसी खबरों ने होली का माहौल फीका कर दिया है और हटाने की स्थिति में व्यापक आंदोलन छिड़ सकता है।
दूसरी ओर, JDU के MLC संजय गांधी का रुख अपेक्षाकृत संस्थागत रहा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जो भी निर्णय लेंगे, पार्टी उसका समर्थन करेगी—चाहे वह मुख्यमंत्री बने रहें या राज्यसभा जाएं।
“नीतीश कुमार जो भी फैसला लेंगे, हम उसका समर्थन करेंगे।” — संजय गांधी, MLC, JDU
कांग्रेस नेता उदित राज ने इस पूरी संभावना को ‘आश्चर्यजनक’ बताया और सवाल उठाया कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं और केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होते हैं, तो उनकी भूमिका क्या होगी। BJP नेता आरपी सिंह ने कहा कि उन्हें JDU की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे या राज्यसभा जाने को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है और उनकी उम्मीद है कि नीतीश कुमार पद पर बने रहेंगे।
फिलहाल तस्वीर का सबसे अहम हिस्सा यही है: अटकलें तेज हैं, बयान कई दिशाओं से आ रहे हैं, लेकिन निर्णायक संकेत JDU की आधिकारिक सूची और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिलेंगे। तब तक बिहार की राजनीति में यह मुद्दा केंद्र में रहने वाला है।






