वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हर एक ग्रह एक निश्चित समय अंतराल के बाद राशि बदलता है, जिससे योग-राजयोग का निर्माण होता है। इसी क्रम में होली के बाद ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति मिलकर नवपंचम राजयोग बनाने जा रहे हैं। वर्तमान में आत्मा, पिता और सम्मान के कारक माने जाने वाले सूर्य कुंभ राशि (शनि की राशि) और गुरु बुध की राशि मिथुन (दृक पंचांग के अनुसार) में विराजमान है। 5 मार्च 2026 की रात (लगभग 10:41 बजे) सूर्य और गुरु एक-दूसरे से 120 डिग्री के कोण पर होंगे, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष में इस राजयोग को लाभकारी और बेहद शुभ माना गया है। वैसे तो इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा लेकिन इसके बनने से 3 राशियों के लिए लकी साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
मिथुन राशि पर प्रभाव
- रुके हुए कामों को गति मिल सकती है।
- नौकरीपेशा को पदोन्नति और वेतन वृद्धि का लाभ मिल सकता हैं।
- नई नौकरी के कई अवसर मिल सकते हैं।
- समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है।
- परिवार के साथ संबंध मधुर होंगे ।
- भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि के प्रबल योग हैं।
- छात्रों को उच्च शिक्षा पाने के लिए विदेश जाने का मौका मिल सकता है।
- व्यापार में मुनाफे के साथ नया सौदा मिल सकता है।
- स्वास्थ्य के लिए परिस्थितियां अनुकूल रह सकती हैं।
सिंह राशि पर प्रभाव
- साहस, आत्मविश्वास और आय में वृद्धि के प्रबल योग हैं।
- संतान पक्ष से कोई खुशखबरी मिल सकती है।
- आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
- लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सकती है।
- व्यापार में बड़ी सफलता हाथ लग सकती है।
- छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते खुल सकते हैं।
- पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है।
- संतान पक्ष की ओर से सुखद समाचार प्राप्त हो सकता है।
मेष राशि पर प्रभाव
- भौतिक सुख सुविधाओं में बढ़ोतरी हो सकती है।
- संतान से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती हैं।
- भाग्य और परिवार का साथ मिल सकता है।
- पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के प्रबल योग हैं।
- आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- आय में वृद्धि के प्रबल योग हैं। आय के नए-नए स्रोत खुल सकते हैं।
- लव लाइफ शानदार रहेगी। जीवनसाथी के साथ तालमेल बेहतर रहेगा।
- स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
ऐसे बनता है कुंडली में नवपंचम राजयोग
- ज्योतिष के मुताबिक, नवपंचम राजयोग तब बनता है जब दो ग्रह आपस में पंचम (5वां) और नवम (9वां) भाव या राशि में स्थित होते है। पंचम भाव बुद्धि, शिक्षा, रचनात्मकता और संतान से जुड़ा होता है या जब दो ग्रह एक दूसरे से त्रिकोण भाव में स्थित हो जाते हैं या दोनों ग्रहों के बीच 120 डिग्री का कोण बनता है तथा एक ही तत्व राशि होती है।
- ज्योतिष के मुताबिक, मेष, सिंह व धनु को अग्नि राशि, वृषभ, कन्या तथा मकर को पृथ्वी राशि, मिथुन, तुला और कुंभ को वायु राशि और कर्क, वृश्चिक एवं मीन को जल राशि माना जाता है, ऐसे में जब एक ही तत्व वाली दो राशियों में 2 ग्रह पहुंचकर 120 डिग्री का कोण बनाते हैं, तो नवपंचम राजयोग बनता है।
- ज्योतिष में नवपंचम राजयोग को भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है। सूर्य आत्मविश्वास, पद-प्रतिष्ठा और नेतृत्व की शक्ति देते हैं, जबकि गुरु ज्ञान, धन और विस्तार के कारक हैं, इसलिए राजयोग समृद्धि और सफलता लेकर आता है।
(डिसक्लेमर : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP Breaking News किसी भी ज्योतिषीय दावे या भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






