बिहार की प्रशासनिक मशीनरी को 10 मार्च से शुरू होने वाली मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के लिए अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है। यह दौरा 14 मार्च तक चलेगा और इसका फोकस सिर्फ दौरा नहीं, बल्कि योजनाओं की मौके पर समीक्षा और जनता से सीधा फीडबैक लेना है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री इस चरण में उन जिलों में जाएंगे जहां विकास परियोजनाओं की प्रगति, सेवा वितरण और स्थानीय समस्याओं की स्थिति को सीधे परखा जाएगा। यात्रा के दौरान विभागीय अधिकारियों को मौके पर उपस्थित रहकर अपडेट देना होगा।
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यह यात्रा पहली बार 16 जनवरी को पश्चिम चंपारण से शुरू हुई थी। लेकिन बिहार विधानसभा के बजट सत्र के कारण इसे बीच में रोकना पड़ा। अब सत्र के बीच मिले अंतराल में कार्यक्रम फिर सक्रिय किया गया है।
किन जिलों में जाएगा मुख्यमंत्री का काफिला
10 से 14 मार्च के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, खगड़िया, बेगूसराय और शेखपुरा का दौरा करेंगे। हर जिले में विकास परियोजनाओं का निरीक्षण और समीक्षा बैठक प्रस्तावित है।
कैबिनेट सचिवालय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने इस संबंध में सभी विभागों के प्रमुखों, जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधिकारियों को तैयारियों के निर्देश जारी किए हैं। पत्र के अनुसार, संबंधित विभागों के अधिकारी यात्रा के दौरान मौजूद रहेंगे और अपने विभाग की योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
यात्रा का प्रशासनिक उद्देश्य क्या है
सरकारी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री यह आकलन करना चाहते हैं कि राज्य की योजनाओं का लाभ लोगों तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है और कहां सुधार की जरूरत है। इसी वजह से यात्रा में निरीक्षण के साथ-साथ लोगों से सीधा संवाद भी शामिल किया गया है।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समीक्षा बैठकों में विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और प्रमुख परियोजनाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इसका उद्देश्य यह रखा गया है कि क्रियान्वयन में जो अड़चनें सामने आएं, उनका समाधान फाइल स्तर के बजाय मौके पर तेज़ी से किया जा सके।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में देखें तो यह कार्यक्रम सरकार की उस निरंतरता का हिस्सा है जिसमें जिलावार समीक्षा यात्राओं के जरिए प्रगति की निगरानी की जाती रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री दिसंबर 2024 में राज्यव्यापी ‘प्रगति यात्रा’ पर निकले थे, जो फरवरी 2025 तक चली थी। उस दौरान भी जिलों में जाकर विकास कार्यों की समीक्षा और अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे।
अब ‘समृद्धि यात्रा’ के पुनरारंभ से सरकार का जोर फिर उसी बिंदु पर है—जमीनी स्तर पर योजनाओं की स्थिति, जिलों की वास्तविक जरूरत और प्रशासनिक जवाबदेही। 10 मार्च से शुरू होने वाला यह चरण अगले कुछ दिनों में इसी कसौटी पर परखा जाएगा।