राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी बिहार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लैंड फॉर जॉब घोटाला केस में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने इस केस से संबंधित गैर-आश्रित दस्तावेज देने से भी इनकार कर दिया है।
बता दें कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर दस्तावेज पाने का आरोपियों का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा, ने कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया के तहत पहले अभियोजन पक्ष अपने सबूत पेश करेगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी और कहा कि याचिका खारिज करने से आरोपियों को कोई नुकसान नहीं। अन्य आरोपियों की समान याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज की हैं।
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कोर्ट ने अन्य आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज कीं
कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं का उद्देश्य मुकदमे को शुरुआत में ही पेचीदगियों की भूलभुलैया में धकेलना है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इन दस्तावेजों को एकमुश्त उपलब्ध कराना न केवल उलटी गंगा बहाने जैसा होगा, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया भी पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाएगी।
अदालत ने दो अन्य आरोपियों आर के महाजन और महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दीं। महाजन ने एक अनरिलायड दस्तावेज, जबकि कपूर ने ऐसे 23 दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
क्या होते हैं अनरिलायड दस्तावेज?
अनरिलायड दस्तावेज वे दस्तावेज होते हैं जिन्हें जांच एजेंसियां (जैसे पुलिस या अन्य एजेंसियां) जांच के दौरान जब्त तो कर लेती हैं, लेकिन बाद में अदालत में केस पेश करते समय अभियोजन पक्ष अपने आरोप साबित करने के लिए उन पर भरोसा नहीं करता।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट में लालू परिवार पेश हुआ था। तब लालू यादव ने इन आरोपों को मामने से इनकार कर दिया था और केस का सामना करने की बात कही थी। यह पूरा केस, सीबीआई के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेल के पश्चिम मध्य जोन में चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों से जुड़ा है।
आरोप हैं कि भर्ती किए गए कर्मचारियों ने इन नियुक्तियों के बदले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख के परिवार या सहयोगियों को जमीन दी गई थी। इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ 18 मई 2022 को केस दर्ज किया गया था।
आरोपियों का गुप्त उद्देश्य कार्यवाही को लंबा खींचना है- कोर्ट
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने पारित 35 पृष्ठ के आदेश में कहा कि मुकदमे पर अदालत का वैधानिक नियंत्रण आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में हथियाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों का गुप्त उद्देश्य कार्यवाही को लंबा खींचना है।