नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू परिवार में मचा घमासान अब और तेज हो गया है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के पार्टी और परिवार से नाता तोड़ने के ऐलान के एक दिन बाद, उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने अपनी बहन के ‘अपमान’ को असहनीय बताते हुए परिवार के ‘जयचंदों’ को खुली चेतावनी दी है।

तेज प्रताप ने अपनी बात कहते हुए कहा कि उनके (रोहिणी) साथ जो हुआ, वह उन्होंने सह लिया, लेकिन बहन का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने इस मामले में सीधे अपने पिता लालू प्रसाद यादव से हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि उनके एक इशारे पर जनता ऐसे लोगों को सबक सिखा देगी।

‘बहन का अपमान असहनीय’

तेज प्रताप यादव ने अपनी बात कहते हुए कहा कि शनिवार की घटना ने उनके दिल को झकझोर दिया है। उन्होंने तेजस्वी यादव के करीबियों पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘जयचंद’ कहा।

“कल की घटना ने दिल को भीतर तक झकझोर दिया है। मेरे साथ जो हुआ—वह मैं सह गया। लेकिन, मेरी बहन के साथ जो अपमान हुआ, वह किसी भी हाल में असहनीय है। सुन लो जयचंदो- परिवार पर वार करोगे तो बिहार की जनता तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगी।” — तेज प्रताप यादव

उन्होंने आगे लिखा, “जबसे मेरी रोहिणी बहन के चप्पल उठाने की खबर सुनी, दिल का दर्द अब आग बन चुकी है। इन चंद चेहरों ने तेजस्वी की भी बुद्धि पर परदा डाल दिया है।”

पिता लालू से मांगा ‘एक इशारा’

तेज प्रताप ने इस लड़ाई को परिवार के सम्मान और बेटी की गरिमा से जोड़ते हुए अपने पिता लालू प्रसाद यादव से निर्णायक कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस अन्याय का परिणाम भयावह होगा।

उन्होंने अपने पिता को संबोधित करते हुए लिखा, “मैं माननीय RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मेरे पिता, मेरे राजनीतिक गुरु लालू प्रसाद जी से आग्रह करता हूं। पिता जी, एक संकेत दीजिए। आपका केवल एक इशारा, और बिहार की जनता इन जयचंदों को जमीन में गाड़ देने का काम खुद कर देगी।”

रोहिणी आचार्य ने क्यों छोड़ी राजनीति?

यह पूरा विवाद शनिवार को तब शुरू हुआ जब लालू यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राजनीति और परिवार छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव और एक अन्य व्यक्ति रमीज को जिम्मेदार ठहराया।

“मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।” — रोहिणी आचार्य

बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मेरा कोई परिवार नहीं है। उन्होंने ही मुझे परिवार से निकाला है।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऐलान के बाद वह देर रात राबड़ी आवास छोड़कर चली गईं। यह घटनाक्रम बिहार चुनाव में पार्टी की हार के बाद जिम्मेदारी तय करने को लेकर शुरू हुए आंतरिक संघर्ष का नतीजा माना जा रहा है।