बिहार में राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अब और बड़ा स्वरूप ले रही है। कांग्रेस ने शुक्रवार को घोषणा की कि इस यात्रा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वॉड्रा भी शामिल होंगे। यात्रा का उद्देश्य मतदाता अधिकारों को जागरूक करना और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ जनता को एकजुट करना है। कांग्रेस ने इसे ‘‘ऐतिहासिक आंदोलन’’ बताया है, जो बिहार और पूरे देश के लोगों का ध्यान खींच रही है।

यात्रा एक ऐतिहासिक आंदोलन बन गई

कांग्रेस ने दावा किया है कि ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अब एक ‘‘ऐतिहासिक आंदोलन’’ बन चुकी है। विपक्षी दलों के अनुसार, यह यात्रा केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में जनता को जागरूक करने और उनके अधिकारों के लिए खड़ा होने का प्रतीक है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि इस आंदोलन में इंडिया गठबंधन और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि यह यात्रा ‘वोट चोरी’ के खिलाफ है और लोगों को आकर्षित कर रही है, इसलिए आने वाले सप्ताह में इसे और भी मजबूती दी जाएगी।’’

प्रियंका गांधी 26 अगस्त को सुपौल में

वेणुगोपाल ने यात्रा में शामिल नेताओं का कार्यक्रम भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त को प्रियंका गांधी सुपौल में वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होंगी। उसी दिन महिलाओं का प्रमुख त्योहार हरितालिका तीज व्रत भी है। प्रियंका गांधी इस अवसर का लाभ उठाकर महिला मतदाताओं से संवाद करेंगी और उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करेंगी। इसके अलावा, वह सीतामढ़ी का दौरा करेंगी और मां जानकी मंदिर में पूजा भी करेंगी।

अन्य वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी

कांग्रेस ने बताया कि 27 अगस्त को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, 29 अगस्त को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और 30 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी यात्रा में शामिल होंगे। इसके अलावा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी इस यात्रा में भाग लेंगे। इससे यात्रा को और मजबूती और व्यापक जनसमर्थन मिलेगा।

यात्रा का उद्देश्य और महत्व

‘वोटर अधिकार यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और चुनाव में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। कांग्रेस और विपक्षी दलों का दावा है कि यह यात्रा जनता को यह समझाने में मदद करेगी कि उनके वोट की शक्ति कितनी महत्वपूर्ण है। पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, यात्रा का यह स्वरूप बिहार में विपक्षी एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा।