बुधवार को समृद्धि यात्रा के दूसरे दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीमांचल में उतरे। दिल्ली कूच और राज्यसभा चर्चा के शोर के बीच उन्होंने दिन की शुरुआत अररिया से की, जहां 546 करोड़ रुपये की 68 योजनाओं पर एक साथ काम शुरू कराया गया।
मंगलवार रात मधेपुरा में रुकने के बाद सीएम हेलीकॉप्टर से सुबह करीब 10 बजे अररिया पहुंचे। यहां उनका फोकस साफ था: प्रशासनिक ढांचा, विकास योजनाएं और जिले के कामकाज की सीधे समीक्षा। पुलिस केंद्र के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया गया, फिर रिमोट के जरिए अलग-अलग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ।
अररिया में विकास का बड़ा पैकेज, मंच पर निगाहें भीड़ पर नहीं अफसरों पर थीं
अररिया दौरे का सबसे अहम हिस्सा सिर्फ जनसभा नहीं, बल्कि फाइलों और प्रगति रिपोर्ट की जांच थी। सीएम ने कोसी दुर्गंध परियोजना परिसर का दौरा किया और वहां लगे विभिन्न विकास स्टॉलों का निरीक्षण किया। इसी परिसर में कोसी दुर्गंध परियोजना के तहत अररिया सेंटर की नवीकरण योजना का उद्घाटन भी किया गया।
इसके बाद अररिया कॉलेज स्टेडियम ग्राउंड में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक का एजेंडा जिले में चल रहे विकास कार्यों की गति, क्रियान्वयन और आगे की टाइमलाइन रहा।
अररिया कॉलेज के सभा स्थल पर लोगों से सीधा संवाद करने के बाद सीएम का काफिला हेलीकॉप्टर से किशनगंज जिले के ठाकुरगंज के लिए रवाना हुआ। सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में यह यात्रा सिर्फ विकास कार्यक्रम भर नहीं मानी जा रही, इसे राजनीतिक तापमान नापने की कवायद भी समझा जा रहा है।
राज्यसभा चर्चा तेज, लेकिन भाषणों में नहीं आया कुर्सी छोड़ने का मुद्दा
समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण में नीतीश कुमार को सीमांचल और कोसी क्षेत्र के 10 जिलों का दौरा करना है। मंगलवार को वे सुपौल और मधेपुरा गए थे। बुधवार को अररिया-किशनगंज के बाद गुरुवार, 12 मार्च को कटिहार और पूर्णिया, शुक्रवार, 13 मार्च को सहरसा और खगड़िया, जबकि शनिवार, 14 मार्च को बेगूसराय और शेखपुरा का कार्यक्रम तय है।
सियासी हलकों में अगले महीने उनके राज्यसभा जाने और नई सरकार के गठन की चर्चा पहले से तेज है। इसी वजह से इस यात्रा को सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम से ज्यादा वजन के साथ देखा जा रहा है। दिलचस्प यह रहा कि मंगलवार को सुपौल और मधेपुरा के संबोधनों में उन्होंने राज्यसभा जाने पर कोई टिप्पणी नहीं की। मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों पर भी वे सार्वजनिक रूप से चुप रहे।
अब निगाहें यात्रा के अगले पड़ाव कटिहार और पूर्णिया पर हैं, जहां विकास घोषणाओं के साथ उनके राजनीतिक संकेतों को भी बारीकी से पढ़ा जाएगा।






