राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व सांसद प्रिंस राज पासवान को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। यह घोषणा सोमवार (9 मार्च) को पटना में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में की गई। पार्टी प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बैठक के दौरान यह जानकारी दी।
बैठक में मौजूद नेताओं और पदाधिकारियों के बीच प्रिंस राज के नाम पर सहमति बनी और उन्हें सर्वसम्मति से यह जिम्मेदारी सौंपी गई। फैसले के तुरंत बाद प्रिंस राज ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि वह दी गई जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।
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“मुझे जो जिम्मेदारी दी गई है, उसका पालन करूंगा। हमारा प्रयास रहेगा कि पार्टी पहले से बेहतर प्रदर्शन करे और आगे बढ़े।”- प्रिंस राज पासवान
संगठन विस्तार और रणनीति पर जोर
नई भूमिका संभालने के बाद प्रिंस राज ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर फैसले किए जाएंगे। उनके मुताबिक, संगठन की दिशा और चुनावी रणनीति जैसे मुद्दों पर सामूहिक राय के आधार पर आगे बढ़ना प्राथमिकता होगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर बनाना उनका मुख्य लक्ष्य है। साथ ही, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा ताकि भविष्य के राजनीतिक फैसले व्यापक परामर्श के साथ लिए जा सकें।
युवा राजनीति पर टिप्पणी, निशांत कुमार का स्वागत
राजनीतिक भागीदारी में युवाओं की भूमिका पर बोलते हुए प्रिंस राज ने कहा कि यह युवाओं का दौर है और उनमें सबसे अधिक ऊर्जा होती है। निशांत कुमार के JDU में शामिल होने से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्वागत का रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि वह पहले भी मानते रहे हैं कि युवाओं को राजनीति में आना चाहिए। अपने तर्क में उन्होंने नेपाल का उदाहरण दिया और कहा कि वहां 35 वर्ष की उम्र का युवा प्रधानमंत्री भी बनता है। उनके मुताबिक, वैश्विक राजनीति में भी युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है और यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
चिराग पासवान और महागठबंधन पर क्या कहा
चिराग पासवान से जुड़े सवाल पर प्रिंस राज ने कहा कि हर नेता अपने कार्यकर्ताओं और संगठन को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता रामविलास पासवान और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों से जुड़ी है।
उनके अनुसार पार्टी की प्राथमिकता गरीब, शोषित और पिछड़े तबकों के उत्थान के लिए काम करना है। यह रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और संगठनात्मक मजबूती साथ-साथ चलनी चाहिए।
महागठबंधन में बने रहने या अलग राह चुनने के सवाल पर प्रिंस राज ने कहा कि ऐसे निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं। उन्होंने दोहराया कि अभी उनका प्राथमिक फोकस पार्टी को मजबूत करना है और आगे की दिशा नेताओं-कार्यकर्ताओं के सुझावों के आधार पर तय होगी।
कौन हैं प्रिंस राज पासवान
प्रिंस राज समस्तीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उनके पिता और सांसद रामचंद्र पासवान के निधन के बाद 24 अक्टूबर 2019 को हुए उपचुनाव में वह समस्तीपुर से सांसद चुने गए थे।
उनका राजनीतिक परिवार बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। उनके चाचा रामविलास पासवान और पशुपति कुमार पारस राज्य की प्रमुख राजनीतिक शख्सियतों में गिने जाते हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान उनके चचेरे भाई हैं।
प्रिंस राज ने 2013 में सक्रिय राजनीतिक शुरुआत की थी। इसके बाद 2015 में उन्होंने कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा। अब RLJP में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के साथ उनकी भूमिका संगठनात्मक स्तर पर और महत्वपूर्ण मानी जा रही है।