तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर नीतीश सरकार को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि उनकी 17 महीने की महागठबंधन सरकार ने बिना किसी पेपर लीक के 2.20 लाख से ज्यादा शिक्षक अभ्यर्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण पारदर्शिता के साथ नौकरी दी थी। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा-जदयू सरकार ने शिक्षक बहाली परीक्षा (TRE-3) को रद्द कर दिया और चौथी शिक्षक बहाली परीक्षा (TRE-4) को भी टाल दिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने अपनी सरकार के दौरान शिक्षा विभाग को राजद कोटे में लेने की बात कही। उन्होंने लिखा कि यह उनकी विशेष पहल थी। उनके कार्यकाल में युद्ध स्तर पर TRE-1 और TRE-2 के अंतर्गत रिकॉर्ड 2,20,000 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए और उनकी ज्वाइनिंग भी कराई गई। तेजस्वी यादव ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने TRE-3 की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।
“17 महीनों की महागठबंधन सरकार में मेरी विशेष पहल पर शिक्षा विभाग को राजद कोटे में लेकर सर्वप्रथम युद्ध स्तर पर TRE-1 और TRE-2 के अंतर्गत निर्धारित समय-सीमा के भीतर, बिना किसी पेपर लीक के, पूर्ण पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड 2,20,000 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर ज्वाइनिंग कराई गई। हमने TRE-3 की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रारंभ कराई, लेकिन जनवरी 2024 में हमारी सरकार के हटते ही पेपर लीक के कारण TRE-3 को रद्द कर दिया गया और बाद में यह परीक्षा भी विलंब से आयोजित हुई।” (तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार)
सीएम नीतीश का वादा और अब तक का हाल
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वादे की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने युवाओं से वादा किया था कि बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों की गणना कर जल्द ही TRE-4 परीक्षा आयोजित की जाएगी। तेजस्वी ने बताया कि उस घोषणा को लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक TRE-4 की वैकेंसी तक जारी नहीं की गई है।
तेजस्वी ने भाजपा-जदयू सरकार पर युवाओं की जरूरतों को समझने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से जारी कैलेंडर का हवाला दिया। उस कैलेंडर के अनुसार TRE-4 परीक्षा अगस्त 2024 में ही हो जानी चाहिए थी।
“बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से जारी कैलेंडर के अनुसार TRE 4 परीक्षा अगस्त 2024 में ही हो जानी चाहिए थी, लेकिन चुनाव आयोग, तंत्र और 10 हजरिया की बदौलत सत्ता हासिल करने वाली भाजपा-जदयू सरकार युवाओं की जरूरतों को समझने में विफल रही। बाद में वर्ष 2025 के अक्टूबर में परीक्षा कराने की बात कही गई, ताकि चुनावी आचार संहिता लागू होते ही परीक्षा टल जाए और ऐसा ही हुआ। चुनाव हो गए, सरकार बन गई, कई महीने बीत गए, लेकिन आज भी शिक्षक अभ्यर्थी इंतजार कर रहे हैं।” (तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार)
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि परीक्षा को जानबूझकर अक्टूबर 2025 में कराने की बात कही गई थी, ताकि चुनावी आचार संहिता लागू होते ही परीक्षा टल जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा ही हुआ, चुनाव हो गए, सरकार भी बन गई और कई महीने बीत गए, लेकिन शिक्षक अभ्यर्थी आज भी अपनी परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं।
पांच लाख नौकरियां देने का दावा
तेजस्वी यादव ने उपमुख्यमंत्री रहते हुए अपने 17 महीने के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने 5 लाख युवाओं को नौकरियां दीं और 3,50,000 से अधिक नौकरियों की प्रक्रिया शुरू कराई।
तेजस्वी ने वर्तमान डबल इंजन सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार बिना किसी कारण के परीक्षाएं टाल रही है। इसके कारण अभ्यर्थियों की आयु सीमा पार हो रही है और उनका धैर्य जवाब दे रहा है। उन्होंने जोर दिया कि हर युवा नौकरी पाकर अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाना चाहता है और अपने परिजनों के सपनों को साकार करना चाहता है।
𝟏𝟕 महीनों की महागठबंधन सरकार में मेरी विशेष पहल पर शिक्षा विभाग को राजद कोटे में लेकर सर्वप्रथम युद्ध स्तर पर शिक्षा विभाग में 𝐓𝐑𝐄-𝟏 और 𝐓𝐑𝐄-𝟐 के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के अंदर बिना किसी पेपरलीक, संपूर्ण पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड 𝟐,𝟐𝟎,𝟎𝟎𝟎 से अधिक अभ्यर्थियों को…
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) April 9, 2026






