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‘तेजस्वी यादव की भाषा खैनी-चूना जैसी’, भड़के प्रशांत किशोर, राहुल गांधी के लिए क्या कहा?

Written by:Deepak Kumar
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‘तेजस्वी यादव की भाषा खैनी-चूना जैसी’, भड़के प्रशांत किशोर, राहुल गांधी के लिए क्या कहा?

बिहार बदलाव यात्रा के तहत सोमवार (18 अगस्त, 2025) को सुपौल पहुंचे जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने महागठबंधन और बीजेपी के नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तेजस्वी यादव, राहुल गांधी, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी और ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव को एक-एक कर आड़े हाथों लिया। प्रशांत किशोर ने जनसभा में कहा कि बिहार के युवा अब लालू-तेजस्वी और नीतीश से आगे बढ़ चुके हैं और जनता बदलाव की मांग कर रही है। उन्होंने महागठबंधन और बीजेपी दोनों को जनता की समस्याओं से बेपरवाह बताते हुए कटाक्ष किया।


तेजस्वी और राहुल गांधी पर तीखा वार

प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव के खैनी-चूना वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी भाषा यही है और अब बिहार की जनता इससे आगे बढ़ चुकी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पीके ने कहा, “राहुल गांधी केवल चुनाव के वक्त ही बिहार आते हैं। वे 55 साल के हो गए हैं। अगर कभी चुनाव के अलावा एक रात भी बिहार में रुके हों तो बताएं? तमिलनाडु-महाराष्ट्र में जब बिहारी बच्चों से मारपीट हुई तब राहुल गांधी कहां थे?” उनका कहना था कि नेताओं की गैर-जिम्मेदारियों की वजह से युवा पीढ़ी निराश हो रही है और वे बदलाव चाहते हैं।


सम्राट चौधरी और बिजेंद्र यादव पर आरोप

बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी समझ केवल निजी झगड़ों तक सीमित है, जबकि अपराध के असली कारण प्रशासन की बालू-शराब माफिया से कमाई में व्यस्तता है। ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव पर टिप्पणी करते हुए पीके ने कहा, “बिहार में 40 साल से लोग बाढ़ झेल रहे हैं। वे खुद 9 बार से विधायक हैं, लेकिन बाढ़ रुकी क्या?” उनका आरोप था कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही।


मुख्यमंत्री और पुलिस पर कटाक्ष: जनता तय करेगी भविष्य

प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अचेत अवस्था में हैं और राज्य की पुलिस जनता की सुरक्षा करने के बजाय शराब और बालू माफिया से पैसा वसूलने में लगी हुई है। पीके ने चेतावनी दी कि आने वाले चुनाव में बिहार की जनता तय करेगी कि राज्य अपराध और भ्रष्टाचार के रास्ते पर जाएगा या विकास और सुशासन की दिशा में। उनका संदेश स्पष्ट था कि जनता अब बदलाव की मांग कर रही है और उनके वोट इसी दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।