डबरा/सलिल श्रीवास्तव।
भाजपा के शासनकाल में बिजली पानी की समस्या इतनी मुखर होती जा रही है कि अब उनके नेता ही इन समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करने लगे हैं ताजा मामला पिछोर नगर पंचायत का है जहां बिजली और पानी की समस्या इतना विकराल रूप ले चुकी है कि भाजपा नेताओं ने अपनी सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और नगर पालिका प्रशासन बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तो और पिछोर दौरे पर रही महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी का घेराव कर रास्ता रोका और उन्हें अपनी समस्या सुनाई मंत्री अपने सहज भाव के साथ जनता के बीच पहुंची उनकी समस्या सुनी और हल करने का आश्वासन दिया आपको बता दें कि महिला बाल विकास मंत्री कल पिछोर क्षेत्र के कई गांव में जनता के बीच पहुंची थी और उनकी समस्याओं को सुनकर हल कर आ रही हैं इसी दौरान पिछोर के सैकड़ों लोग भाजपा नेता नवल भार्गव ,कमलेश पंडा के नेतृत्व में नगर पंचायत के सामने इकट्ठा हो गए और नगर पालिका प्रशासन सीएमओ और बिजली विभाग के सुपरवाइजर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की इसी दौरान मंत्री इमरती देवी की पिछोर से गुजरी लोगों ने उनका घेराव कर रास्ता रोक लिया और मंत्री को अपनी समस्या सुनाई मंत्री ने उन्हें समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया और तत्काल अधिकारियों से समस्या के समाधान के लिए कहा फिर भी यह प्रदर्शन लोगों के बीच चर्चा में रहा क्योंकि भाजपा के शासनकाल में भाजपा नेता प्रदर्शन कर रहे हैं यही कारण रहा कि कांग्रेसी इस मामले में जमकर चुटकी ले रहे हैं।
BJP नेताओं ने सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी का रास्ता रोककर किया घेराव
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






