विदिशा।विपिन शर्मा
शमशाबाद खरीदी केंद्र पर पिछले एक सप्ताह से बारदाना खत्म होने से गेंहू की तुलाई बन्द पड़ी है इस आक्रोशित किसानों ने तहसीदार निवास का घेराव व रोड जाम कर गेंहू तुलाई शुरू करने की मांग की ।किसानों ने बताया इस तपती धूप में खुले आसमान मैं घर बार छोड़कर गेंहू की तुलाई का इंतज़ार कर रहा है लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अभी तक खरीदी केंद्र पर वारदाना नही यदि हमारे गेंहू की तुलाई समय पर नही हुई तो कर्ज नही चुका पाएंगे और मजबूरन हमे आत्मा हत्या जैसा कदम उठाना पड़ेगा । दरअसल शमशाबाद सोसायटी की खरीदी केंद्र भगवानपुर,शमशाबाद, डंगरवाडा खरीदी केंद्र पर बारदाना खत्म होने से गेहूं की खरीदी बन्द पड़ी है जिससे किसान खुले आसमान के नीचे तपती धूप में तुलाई का इंतज़ार कर रहे हैं किसानों ने बताया कि 10 पूर्व हमारे पास खरीदी केंद्र से मेसिज गेंहू तुलाई के लिए आया था तो हम खरीदी केंद्र ट्राली मे गेंहू लेकर आये तो यहाँ पता चला कि वारदाना नही है और तुलाई बंद है हमने अधिकरियो से पूछा तो साइड बंद होने की बात कह रहे हैं लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी आज तक वारदाना नही आया एक सप्ताह से हम खुले आसमान के नीचे धूप में तुलाई का इंतज़ार कर रहे हैं और इतने में मौसम खराब हो जाता है तो बारिस के डर से अनाज को पन्नी से ढक देते हैं की हमारा अनाज भीग जाता है तो दूसरे दिन धूप में सुखाते है औऱ किसानों ने बताया की साहब हम 4 माह खेत में दिन रात मेहनत करके अनाज पैदा करते हैं और फिर बचने के लिए खरीदी केंद्र का इंतज़ार करते हैं की हमारी फसल सरकारी दामो मे बिके ओर हमे अच्छे दाम मिले जिससे हम अपना कर्ज चुकाए ओर परिवार का भरणपोषण कर लेकिन खरीदी केंद्र पर वारदाना न होने से फसल समय पर नही बिक रही जिससे हमें परेशान हैं हम मीडिया के माध्यम से सरकार से गुहार लगाकर बारदाना भेजने की मांग करते हैं किसानों ने बताया कि सरकार 26 मई तक खरीदी की अंतिम तारीख है ऐसे में एक सप्ताह से तुलाई बन्द होने से कैसे हमारा अनाज तुलाई हो जाएगी वही अधिकारी से पूछा तो वारदाना जल्द आने की बात कही गई
गेंहू की तुलाई ना होने पर किसानों ने दी आत्महत्या की चेतावनी
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






