सीरिया में ड्रूज समुदाय के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई के जवाब में इजरायल ने बड़ा कदम उठाया है। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बुधवार को सीरियाई राजधानी दमिश्क में स्थित सेना के मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर हमला किया। यह हमला दक्षिणी सीरिया में बशर अल-असद सरकार द्वारा ड्रूज नागरिकों पर की जा रही कथित ज्यादतियों के प्रतिरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

ड्रूज समुदाय की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता

IDF ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी करते हुए कहा “हमने दमिश्क में सीरियाई सेना के सैन्य मुख्यालय के प्रवेश द्वार को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई दक्षिणी सीरिया में ड्रूज समुदाय के खिलाफ चल रही दमनात्मक कार्रवाई के जवाब में की गई है।” IDF ने यह भी जोड़ा कि वे स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे या कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सीरिया में क्या हो रहा है?

पिछले कुछ हफ्तों में दक्षिणी सीरिया में ड्रूज समुदाय के खिलाफ बल प्रयोग, घरों पर हमले, जबरन हिरासत और उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं। असद सरकार पर आरोप है कि वह अल्पसंख्यकों की आवाज को कुचलने के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है। स्वेदा और आसपास के इलाकों में विरोध-प्रदर्शनों पर बल प्रयोग हुआ, जिसके चलते ड्रूज समुदाय अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग कर रहा था।

इजरायल का लक्ष्य, सिर्फ सैन्य प्रतिष्ठान

IDF ने यह स्पष्ट किया है कि उनका निशाना सीरियाई शासन के सैन्य केंद्र, किसी आम नागरिक या धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इस हमले का मकसद स्पष्ट रूप से सीरियाई शासन को चेतावनी देना है कि यदि वह अपने ही नागरिकों पर ज़ुल्म ढाता है, तो इजरायल चुप नहीं बैठेगा, खासकर जब बात सीमावर्ती समुदायों की हो।

राजनीतिक नेतृत्व की मंजूरी से हुई कार्रवाई

IDF ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि यह हमला इजरायली राजनीतिक नेतृत्व के निर्देश पर किया गया। हमला पूर्व-नियोजित और सीमित दायरे में किया गया। सेना को क्षेत्र में किसी भी “परिदृश्य” के लिए तैयार रहने के निर्देश हैं यह स्पष्ट करता है कि इजरायल इस बार सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहना चाहता।

क्या बढ़ेगा तनाव?

इस ताज़ा हमले के बाद सीरिया और इजरायल के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। क्षेत्रीय शक्तियों- विशेषकर ईरान और रूस, जो असद सरकार के समर्थक हैं, उनकी प्रतिक्रिया अहम होगी। लेबनान का हिजबुल्ला संगठन, जो ड्रूज विरोधी रुख रखता है, सक्रिय हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला आने वाले हफ्तों में सीरिया-इजरायल सीमा पर हलचल और आक्रोश बढ़ा सकता है।