“मीडिया द कोविड वारियर” (लॉक डाउन 25वां दिन ) -आलेख इंजी रीतेश शर्मा “माही”
कोविड-19 के विरुद्ध एक ओर जहाँ शासन-प्रशासन , और मैदान में काम करने वाले तमाम योद्धा अपने अपने क्षेत्र में अपनी पूर्ण दक्षता से लगे हुए हैं , वहीं मैदान में उनके द्वारा किये जाने वाले कार्य और जो शासन –प्रसाशन के द्वारा जो जन हित में समय समय पर आदेश ,दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं उनको जनमानस तक पहुंचाने के लिए कुछ लोग नेपथ्य में रहकर साइलेंट होकर दूसरी और मोर्चा संभाले हुए है ,वो है हमारे “खबरनबीस”, वे भी घर परिवार की चिंता किये बगैर अपन कर्तव्य पूरा क्र रहे है उनके किए गए कार्यों का परिणाम या तो टी.व्ही चनलो पे या फिर मोबाइल में डिजिटल लिंक पे दिख जाता है फिर होती है सुबह जब आप सब सो जाते है तब बनती है खबर और फिर सुबह सफेद पे काले स्याही से लिखा खबरनामा दिख जाता है.
एक तरफ जहां लॉक डाउन हुए जनमानस अपने अपने घरो में कैद है अपनों के बीच है वहीँ सड़क में साइकल चलाता हुआ होकर आपके दरवाजे पे अख़बार को दाल के जाता है और जब सुबह-सुबह आंखें मलते हुए आप खबरों के इंतजार में अपने घर के कपाट खोलते है तो खबरों का बुके अख़बार की शक्ल में आपको मिलता है , दिन शुरू होने से पहले जिसकी सबसे पहले दरकार होती है.
इसी प्रकार चैत्र-बैसाख की तपती दोपहरी हो या जाड़े की सर्द हवाए या कोरोना जैसी महामारी काँधे पे अपना कैमरा उठाये हमेशा एक्शन मोड़ में तैयार न्यूज़ एंकर के साथ आपके लिए सनसनी खबर ब्रेक करने लिए एक मुकाम से दुसरे मुकाम तक दिन रात फिरते है तब कही जाके न्यूज़ चेनलो पे आपको खबर देखने मिलती है .
हालांकि डिजिटल औऱ इलेक्ट्रॉनिक दौर में सब तत्काल मिल जाता है फिर भी अखबार की महत्ता कायम अभी भी है और जो सफेद पर काली स्याही से लिखी हुई इबारत से मन तृप्त होता है उसकी बात कुछ और है , औऱ ये सब होता है मैदान में खबर की तलाश में खोजी सैनिक की तरह बैखौफ लगे हुए मैदानी पत्रकार ,फोटो जर्नलिस्ट के द्वारा जो खबर लाते है ,उसे बनाते है फिर टीम का कप्तान एडिटर उसको सम्पादित कर छपने को देता है , खबर लिखने का सिलसिला देर रात तक चलता रह्ता है खबर लिखने और प्रिंट होने के दरमियान काफी लोग काम करते है औऱ जब छप के आती है तो अखबर की शक्ल इख्तियार करती है फिर शुरू होता है होकरो का काम .
आपके हाथो में आने से पूर्व की मेहनत के पीछे कई लोगों के हाथ है जो नेपथ्य में रह कर इसे अंजाम दे रहे है , मीडिया के वारियर दिन रात एक करके आपके लिए खबर तैयार करते है तो निसंदेह सुबह उसका सुखद परिणाम भी मिलता है
मैं सलाम करता हूं उन सभी कोविद वारियरो को जो नेपथ्य में रहकर कार्य कर रहे है , समस्त मीडिया कर्मियों को , चैनलों में काम कर रहे तकनीकी स्टाफ को , न्यूज़ एंकरों को , पत्रकारों को फोटोग्राफर एवं कैमरा पर्सन को , एवं डिजिटल के माध्यम से मोबाइल पे खबरों को पहुंचाने वाले तकनीकी विदो को जो खबरों को तत्काल डिजिटलाइज कर उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करते हैं जारी करते हैं, इन सभी को मैं सलाम करता हूं यह भी सच्चे योद्धा है जो कर्तव्यो के लिए जान हथेली पे लिए हुए है । (लॉक डाउन का 25वां दिन )-आलेख इंजी रीतेश शर्मा “माही”
“मीडिया द कोविड वारियर” आलेख इंजी रीतेश शर्मा “माही”
Written by:Gaurav Sharma
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






