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भारत-EU ट्रेड डील: मर्सिडीज, BMW जैसी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 10% होगी, 2027 से घटेंगी कीमतें

Written by:Banshika Sharma
Published:
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत लग्जरी कारों पर लगने वाला आयात शुल्क 110% से घटाकर 10% हो जाएगा। 2027 तक लागू होने वाले इस फैसले से मर्सिडीज, ऑडी जैसी CBU कारों की कीमतें आधी हो सकती हैं, हालांकि इसकी एक सालाना सीमा तय की गई है।
भारत-EU ट्रेड डील: मर्सिडीज, BMW जैसी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 10% होगी, 2027 से घटेंगी कीमतें

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 साल की लंबी बातचीत के बाद आखिरकार मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस समझौते का सबसे बड़ा असर लग्जरी कार बाजार पर पड़ने वाला है। समझौते के तहत, यूरोप से पूरी तरह बनकर भारत आने वाली कारों पर लगने वाला आयात शुल्क 110% से घटाकर सिर्फ 10% कर दिया जाएगा।

यह ऐतिहासिक फैसला भारत-EU समिट में लिया गया, जिसे 2027 तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस कदम से मर्सिडीज-बेंज, BMW, ऑडी और फरारी जैसी कंपनियों की स्पोर्ट्स और लग्जरी कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार ने इस छूट का लाभ हर साल केवल 2.5 लाख कारों तक सीमित रखा है।

किन कारों की कीमतें होंगी कम?

इस समझौते का फायदा केवल उन्हीं कारों को मिलेगा जो पूरी तरह से निर्मित इकाई (CBU) के तौर पर सीधे यूरोप से आयात की जाती हैं। भारत में ज्यादातर लग्जरी कारें जैसे मर्सिडीज और BMW के कई पॉपुलर मॉडल पार्ट्स के रूप में आयात कर यहां असेंबल (CKD) किए जाते हैं। इन पर पहले से ही 15-16.5% का शुल्क लगता है, इसलिए उनकी कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं होगा।

लेकिन जो मॉडल सीधे यूरोप से बनकर आते हैं, वे बेहद सस्ते हो जाएंगे। उदाहरण के लिए, मर्सिडीज बेंज G-वैगन की मौजूदा कीमत करीब 4 करोड़ रुपए है, जिसमें लगभग 2.1 करोड़ रुपए सिर्फ इंपोर्ट ड्यूटी होती है। नई दरें लागू होने के बाद यही कार 2 करोड़ रुपए से भी कम में मिल सकती है।

कब और कैसे लागू होगा यह नियम?

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आयात शुल्क में यह कटौती रातों-रात नहीं होगी। इसे अगले कुछ सालों में धीरे-धीरे कम किया जाएगा और इसके 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में पूरी तरह लागू होने की संभावना है।

इसके लिए सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) सिस्टम भी तय किया है। इसके तहत हर साल यूरोप से आयात होने वाली अधिकतम 2.5 लाख गाड़ियों पर ही 10% की घटी हुई ड्यूटी का लाभ मिलेगा। इस कोटे की निगरानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) और कस्टम्स डिपार्टमेंट करेगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों को फिलहाल छूट नहीं

इस समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लगभग 5 साल तक ड्यूटी कटौती से बाहर रखा गया है। यह फैसला टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे घरेलू निर्माताओं को संरक्षण देने के लिए किया गया है। 5 साल की अवधि के बाद यूरोपीय इलेक्ट्रिक कारों पर भी यह छूट लागू की जा सकती है।

भारतीय बाजार और व्यापार पर असर

बिक्री के मामले में भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। हालांकि, भारत के सालाना 44 लाख यूनिट वाले कार बाजार में यूरोपीय निर्माताओं की हिस्सेदारी 4% से भी कम है। ऊंचे टैक्स की वजह से विदेशी कंपनियों के लिए यहां महंगी कारें बेचना मुश्किल होता था। इस डील के बाद मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के लिए भारत में अपना कारोबार बढ़ाना आसान हो जाएगा।

यह समझौता सिर्फ ऑटो सेक्टर तक सीमित नहीं है। साल 2024-25 में भारत और EU का आपसी व्यापार 190 अरब डॉलर को पार कर गया है। इस FTA के बाद व्यापार के दोगुना होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे सामान और सेवाओं पर टैरिफ कम होंगे।

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