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इन दो बैंकों के खिलाफ RBI ने उठाया सख्त कदम, एक का लाइसेंस रद्द, दूसरे पर लगा प्रतिबंध

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आरबीआई ने एक बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है, अब इसे कारोबार की अनुमति नहीं होगी। एक बैंक पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। ग्राहकों को पैसे निकालने की अनुमति नहीं होगी। 
इन दो बैंकों के खिलाफ RBI ने उठाया सख्त कदम, एक का लाइसेंस रद्द, दूसरे पर लगा प्रतिबंध

अप्रैल में भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की कार्रवाई का सिलसिला जारी है। दो बैंकों के खिलाफ सख्त कदम उठाया गया है। किसी पर बैन लगा है, तो किसी को बंद कर दिया गया है। इसकी जानकारी आरबीआई ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है। प्रतापगढ़ में स्थित नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। इसे 10 अप्रैल से बैंकिंग व्यवसाय बंद करने का आदेश दिया गया है। सेंट्रल बैंक ने उत्तर प्रदेश के आयुक्त और को-ऑपरेटिव के रजिस्ट्रार से संबंधित निर्देश और एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का अनुरोध भी किया है।

जालना में स्थित मोतीराम अग्रवाल जालना मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसे भी 10 अप्रैल से बैंकिंग बिजनेस बंद करने का आदेश दिया गया है। हालांकि अब तक लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है। आदेश केवल अस्थाई रूप से प्रभावी रहेगा। आरबीआई का निर्देश 6 महीने तक की अवधि के लिए लागू रहेगा। इस दौरान बैंक के स्थिति की समीक्षा भी की जाएगी। सुधार देखने के बाद निर्देश में संशोधन भी हो सकता है। बैन भी हटाया जा सकता है।

आरबीआई ने क्यों उठाया ऐसा कदम?

नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पास पर्याप्त पूंजी और और कमाई की कोई भी संभावनाएं नहीं थी। यदि इस बैंक को कारोबार जारी रखने अनुमति दी जाती है, तो ग्राहकों के हितों के लिए यह हानिकारक साबित हो सकता है। अपनी वर्तमान स्थिति के साथ यह बैंक अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि का भुगतान भी नहीं कर सकता।

सरल संपत्तियों में कमी के कारण मोतीलाल अग्रवाल जालना मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस दौरान ग्राहकों  खाते से कोई भी पैसे निकालने की अनुमति नहीं होगी। इसे नए डिपॉजिट को स्वीकार करने से भी रोका गया है। यह लोन या एडवांस्ड को स्वीकृत या रिन्यू भी नहीं कर सकता है। हालांकि बैंक कर्मचारियों के वेतन, किराया, बिजली बिल इत्यादि जरूरी व्यवसाय को जारी रख सकता है।

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ग्राहकों को सुरक्षा भी मिलेगी

आरबीआई के एक्शन के बाद ग्राहकों की परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि उनकी जमा राशि पर पूरी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक खाताधारक डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटीड कॉरपोरेशन (DICGC) से अपनी जमा राशि पर बीमा राशि को क्लेम कर सकता है। हालांकि इंश्योरेस अमाउंट अधिकतम 5 लाख रुपये है। अतिरिक्त जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट https://www.dicgc.org.in/  विजिट करने की सलाह दी जाती है।

Manisha Kumari Pandey
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