रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अगस्त में एक बार बड़ी कार्रवाई की है। कर्नाटक में स्थित तीन सहकारी बैंकों पर जुर्माना लगाया है। द प्रगति को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 2 लाख रुपये, विकास सौहद्रा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, होसपेट पर 1 लाख रुपये और श्री विजय महंतेश को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड हुनगुंड पर 2.50 लाख रुपये रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
इन तीनों बैंकों पर अलग-अलग बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है, जिसका पता आरबीआई को एक निरीक्षण के दौरान चला था । बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया गया है। कार्रवाई की जानकारी सेंट्रल बैंक ने 24 अगस्त को अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है।
आरबीआई ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस
बैंकों के वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए आरबीआई ने 31 मार्च 2025 तक एक संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता चला। जिसके बाद एक नोटिस करते हुए आरबीआई ने बैंक से स्पष्टीकरण मांगा। नोटिस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मौखिक प्रस्तुतियों के आधार पर आरोप सही साबित हुए, इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंकों ने तोड़े ये नियम
श्री विजय महंतेश को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने कुछ लोन अकाउंट्स को नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया। इसके अलावा निदेशकों से संबंधित लोन भी स्वीकृत किए, जो नियमों के खिलाफ था। प्रगति को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने भी निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। इसके अलावा एक ही उधारकर्ता लिए तय रेगुलेटरी एक्स्पोज़र लिमिट का उल्लंघन किया। इतना ही नहीं प्रूडेंशियल इंटरनेट ग्रॉस एक्स्पोज़र लिमिट और इंटर बैंक काउंटर पार्टी लिमिट का अनुपालन करने में भी असफल रहा। विकास सौहद्रा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने कुछ लोन अकाउंट्स को नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट के तौर पर वर्गीकृत नहीं कर पाया।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
आरबीआई ने अपने नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया है कि तीनों बैंकों के खिलाफ की गई कार्रवाई का असर संबंधित ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। सेंट्रल बैंक ने कहा कि, “यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक और ग्राहक के बीच मौजूद ट्रांजैक्शन या एग्रीमेंट की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है।”
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